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Thailand में लगा आपातकाल, लोकतंत्र समर्थकों ने राजशाही के खिलाफ ‘Three Finger Salute’ कर जताया विरोध

बैंकॉक। थाइलैंड में राजशाही के खिलाफ लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन ( Thailand Protest Against Monarchy ) के बीच गुरुवार को देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने टेलीविजन पर लाइव प्रसारण में इसकी घोषणा करते हुए कहा ‘शांति और व्यवस्था’ बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

आपातकाल लागू होने के बाद से देश में अब प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई है। वहीं, आंदोलन के प्रमुख नेताओं सहित सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। बता दें कि यह फरवरी से चला आ रहा है।

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बीते अगस्त में आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे और राजशाही पर नियंत्रण लगाने की मांग की थी। यह पहला ऐसा मौका है जब सीधे तौर पर राजशाही के खिलाफ इतने विशाल संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हैं और विरोध जता रहे हैं।

लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों ( Pro Democracy Protests ) में शामिल छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया है जो सारी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। प्रदर्शनकारी छात्र ‘थ्री फिंगर सैल्यूट’ कर अपना विरोध जता रहे हैं।

क्या है ‘थ्री फिंगर सैल्यूट’

बता दें कि एक किताब पर आधारित हॉलिवुड फिल्म ‘हंगर गेम्स’ से यह सैल्यूट निकला है। ‘थ्री फिंगर सैल्यूट’ का इस्तेमाल किसी के प्रति सम्मान या प्रेम प्रकट करना हो या अलविदा कहना के लिए किया जाता है। हालांकि समय के साथ इसमें थोड़ा बदलाव आया है और अब तानाशाहों के खिलाफ विरोध और गुस्सा जाहिर करने के लिए भी लोग करने लगे हैं।

थाइलैंड में लोकतंत्र का समर्थन करने के लिए 2014 के बाद से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस सैल्यूट के जरिए देश की सैन्य सत्ता के खिलाफ विरोध भी ऐसे ही किया जाता है। थाइलैंड में 2014 में तख्तापलट के बाद सेना ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी खत्म कर दी थी। तभी से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

थाइलैंड के प्रधानमंत्री बने प्रयुथ चान-ओचा, संसद ने दी मंजूरी

वर्तमान में तख्तापलट के मुख्य नेता और पूर्व आर्मी चीफ प्रयुत चान-ओ-चा देश के प्रधानमंत्री हैं। यही कारण है कि लोकतंत्र समर्थक लगातार ‘थ्री फिंगर सैल्यूट’ के जरिए उनका विरोध कर रहे हैं।

2019 में हुए थे चुनाव

बता दें कि थाईलैंड में राजनीतिक उथल-पुथल का लंबा इतिहास रहा है। 2014 में हुए तख्तापलट के बाद पूर्व आर्मी चीफ प्रयुत चान-ओ-चा देश के प्रधानमंत्री बने थे और 2019 में हुए आम चुनाव में वे एक बार फिर से जीत कर दोबारा प्रधानमंत्री बने हैं।

थाइलैंड में अभी भी लोकशाही की तरह ही शासन किया जाता है। थाईलैंड में 1932 में ‘संवैधानिक राजतंत्र’ की स्थापना हुई थी। लेकिन राजा सामाजिक आदर के पात्र बने रहे। हालांकि महाराज भूमिबोल के 2016 में निधन के बाद स्थितियां तेजी से बदल गई हैं। वर्तमान में भूमिबोल के बेटे 68 वर्षीय वजिरालोंगकर्ण थाइलैंड के राजा हैं, लेकिन वे जर्मनी में रहते हैं।












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