DDU की 8 छात्राओं समेत 17 स्टूडेंट्स पर होगी FIR: PRE- PHD परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र का प्रारूप बदले जाने छात्रों का हंगामा, परीक्षा का किया बहिष्कार; उत्तरपुस्तिका भी फाड़ी

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गोरखपुर41 मिनट पहले

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डीडीयू प्रशासन ने इस मामले में उन विद्यार्थियों को निष्कासित करने और केस दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

गोरखपुर के दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में सत्र 2019-20 की प्री पीएचडी परीक्षा के दौरान कई छात्रों ने विवि प्रशासन द्वारा प्रश्न पत्र का प्रारूप बदले जाने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। कई छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया। आरोप है कि परीक्षा के दौरान ही हंगामा कर रहे छात्रों द्वारा करीब सौ से अधिक विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिका फाड़ दी गई। डीडीयू प्रशासन ने इस मामले में उन विद्यार्थियों को निष्कासित करने और केस दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

प्री पीएचडी का कोर्स वर्क 6 महीने में ही पूरा हो जाता है। लेकिन कोरोना महामारी के दौर में सत्र 2019-20 के छात्र-छात्राओं की परीक्षा ढाई साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई थी। इसे लेकर छात्र लगातार आंदोलित थे। इस बीच डीडीयू प्रशासन द्वारा 7 और 9 जनवरी को उनकी परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था। छात्रों को आश्वासन दिया गया था कि जितना पाठ्यक्रम पढ़ाया गया है, उसी के अनुरूप परीक्षा होगी। 7 जनवरी को दीक्षा भवन में दोपहर 1 से 4 बजे तक रिसर्च मेथोडोलॉजी का पेपर था। प्रश्नपत्र हाथ में मिलते ही कुछ छात्र परीक्षा कक्ष से हंगामा करते हुए बाहर निकल आए। उनका आरोप था कि जिस प्रारूप के अनुसार परीक्षा कराए जाने का आश्वासन दिया गया था, उसके विपरीत दूसरे प्रारूप में परीक्षा कराई जा रही है।

PAC भी बुलवाई
छात्रों के हंगामे को देखते हुए डीडीयू प्रशासन ने पीएसी बुलवा ली। दीक्षा भवन के सभी द्वार बंद कर ताले जड़ दिए गए। इस दौरान मुख्य नियंता प्रो. सतीश चन्द्र पाण्डेय छात्रों को समझाते रहे। डीडीयू प्रशासन के मुताबिक शुरू में करीब 10-15 की संख्या में छात्र निकले थे। वहां हंगामे की बात सुनकर कुछ छात्र नेता भी वहां पहुंच गए। डीडीयू प्रशासन के मुताबिक परीक्षा का बहिष्कार कर रहे छात्रों को बाहर जाने की अनुमति दे दी गई लेकिन वे बाहर नहीं निकले और हंगामा करते रहे। करीब दो बजे के बाद अचानक से हंगामा कर रहे छात्रों का समूह दूसरी कक्षाओं में पहुंचने लगा। डीडीयू प्रशासन का आरोप है कि इसी दौरान करीब परीक्षा दे रहे 100-150 छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिका फाड़ दी गई।

इस कार्यवाही का लिया निर्णय
व्यवधान उत्पन्न करने और उत्तरपुस्तिका फाड़ने के आरोपियों को विवि से निष्कासित करने तथा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही विवि प्रशासन ने इन विद्यार्थियों को तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय में प्रवेश पर प्रतिबंध तथा छात्रावास की सुविधा से भी वंचित करने का निर्णय लिया गया है। प्री-पीएचडी पाठ्यक्रम के द्वितीय प्रश्न पत्र कंप्यूटर एप्लीकेशन की परीक्षा पूर्व निर्धारित तिथि 9 जनवरी को होगी। निष्काषित विद्यार्थी इस परीक्षा में भाग नहीं ले पाएंगे। केन्द्राध्यक्ष प्रो. एसके सिंह की रिपोर्ट पर विश्वविद्यालय के अधिनियम एवं अध्यादेश के अनुसार इन विद्यार्थियों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई है।

इन विद्यार्थियों पर है आरोप
डीडीयू प्रशासन के मुताबिक परीक्षा में व्यवधान उत्पन्न करने और उत्तरपुस्तिका फाड़ने वालों में मंदीप राय, कमलकान्त राव, राधा विश्वकर्मा, अन्नू जायसवाल, कृतिका सिंह, रामभरोसे तिवारी, राजन दूबे, अमन यादव, सुधीर मद्धेशिया, अंजली पाण्डेय, राजन विश्वकर्मा, प्रशान्त मौर्या, आनन्द मिश्रा, श्वेता पाण्डेय, दीप्ति, अर्चना, प्रियंका आदि शामिल रहे।

क्या बोले केन्द्राध्यक्ष?
केंद्राध्यक्ष प्रो. एसके सिंह ने अपनी रिपोर्ट में परीक्षा प्रारम्भ होने के बाद करीब 10-15 शोध छात्र-छात्राओं ने परीक्षा का बहिष्कार किया तो उनको बाहर जाने की अनुमति दे दी गई लेकिन उन्होंने सभी परीक्षा कक्षों में जाकर परीक्षाएं बाधित की। उसके बाद भी लगभग 95 प्रतिशित छात्र-छात्राएं शालीनतापूर्वक परीक्षा दे रहे थे। केन्द्राध्यक्ष ने सभी कक्ष निरीक्षकों को आदेश दिया है कि जो छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं उन्हें बाधा न आए, यह सुनिश्चित करें।

कुछ समय बाद केन्द्राध्यक्ष कमरे में वे छात्र-छात्राएं जबरन घुसकर गोपनीय कागजात को फाड़ते हुए तोड़-फोड़ भी करने लगे तथा पूरे कमरे में कागजात को बिखेर दिया। उसके बाद सभी परीक्षा कक्षों के दरवाजों को धक्का देकर अन्दर घुस गए, जो छात्र परीक्षा दे रहे थे, उनके प्रश्न-पत्रों और ओएमआर शीट को जबरदस्ती छिनकर फाड़ने लगे तथा कुछ कक्ष निरीक्षकों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया, जिसमें महिला शिक्षक भी थीं। इस तरह से लगभग 100-150 छात्रों की कापियाँ फाड़ दिए। यदि इन छात्रों पर सख्त अनुशासनिक कार्यवाही नहीं की गई तो आगे परीक्षा कराना संभव नहीं हो पाएगा।

नोटिफिकेशन के मुताबिक ही था फॉर्मेट
विवि प्रशासन ने कहा है कि परीक्षा का फॉर्मेट वैसा ही था, जैसा पहले नोटिफाई किया गया था। प्रथम प्रश्न पत्र रिसर्च मेथोडोलॉजी की परीक्षा कुल 65 अंक की थी, जिसमें 20 अंक का सब्जेक्टिव पेपर तथा 45 अंक का ऑब्जेक्टिव पेपर था। सब्जेक्टिव प्रश्न विवि के विभिन्न विभागों द्वारा ही तैयार किया गया था। जबकि ऑब्जेक्टिव प्रश्न वाह्य परीक्षकों द्वारा तैयार किया गया था। प्रश्नपत्र पढ़ाये गए पाठ्यक्रम में से ही दिया गया था।

जिनकी उत्तरपुस्तिका फटी, उन पर निर्णय आज
मीडिया प्रभारी महेन्द्र सिंह ने बताया कि जिन परीक्षार्थियों की उत्तरपुस्तिका फाड़ी गई है, उन पर निर्णय शनिवार को विवि प्रशासन की मीटिंग में लिया जाएगा। फिलहाल पूरा फोकस 9 जनवर की कम्प्यूटर अप्लीकेशन की परीक्षा सकुशल संपन्न कराए जाने पर है।

मंडलायुक्त को सौंपा ज्ञापन
परीक्षा का बहिष्कार करने वाले छात्रों ने डीडीयू के मुख्य द्वार पर मंडलायुक्त को संबोधित ज्ञापन अपर नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रथम प्रश्न पत्र की परीक्षा 45 नंबर की कराई जानी थी। लेकिन प्रारूप के विपरीत 45 नंबर का बहुविकल्पीय और 20 नंबर की लिखित परीक्षा का पेपर दिया गया। 45 नंबर का पेपर उनके पाठ्यक्रम के बाहर से पूछा गया था। इसीलिए अवसाद में आकर छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार कर कक्ष से बाहर चले गए।

अभाविप का प्रदर्शन आज
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 8 जनवरी से पूर्वाह्न 11 बजे से प्रशासनिक भवन पर प्रदर्शन किया जाएगा। मीडिया संयोजक अनुराग मिश्र ने बताया कि प्री पीएचडी परीक्षा में पाठ्यक्रम के अनुरूप प्रश्न न होने और शांतिपूर्ण तरीके से परीक्षार्थियों द्वारा दी जा रही परीक्षा के दौरान व्यवधान उत्पन्न किए जाने के विरोध में प्रदर्शन होगा। संगठन के सदस्यों से उन्होंने समय पर पहुंचने की अपील की है।

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उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर

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