Monday, November 29, 2021
HomeStatesRajasthanCOPD और अस्थमा मरीजों के लिए पॉल्यूशन खतरनाक: सर्दियों में बिगड़ी एयर...

COPD और अस्थमा मरीजों के लिए पॉल्यूशन खतरनाक: सर्दियों में बिगड़ी एयर क्वालिटी, लंग्स डैमेज का खतरा, 20% मरीज बढ़े; कोहरे में मॉर्निंग वॉक से बचे

  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • In Some Cities Including Jaipur, The Number Of COPD And Asthma Patients Increased By 20 Percent Due To Deteriorating Air Quality.

जयपुर13 मिनट पहले

राजस्थान में दीपावली के बाद अचानक से सर्दी बढ़ गई है। साथ ही, इसका असर एयर क्वालिटी पर पड़ने लगा है। बिगड़ी एयर क्वालिटी ने अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से ग्रसित मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हवा में प्रदूषण के साथ-साथ धूल व अन्य कणों के कारण इन बीमारी से ग्रसित मरीजों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। इसी का असर दिखा कि जयपुर में रोगियों की संख्या में करीब 20 फीसदी इजाफा हुआ है।

एसएमएस हॉस्पिटल के पूर्व अधीक्षक डॉ. वीरेन्द्र सिंह की मानें तो सामान्य दिनों की तुलना में पिछले कुछ दिनों से उनके पास अस्थमा और सीओपीडी से जुड़े रूटीन मरीजों की संख्या में 15 से लेकर 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। कुछ नए मरीज भी आए हैं, जिन्हें पहले कभी अस्थमा की शिकायत नहीं थी। पिछले दिनों जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा जैसे बड़े शहर जहां पिछले दिनों एक्यूआई लेवल 300 के पार पहुंच गया था, उस समय पीएम लेवल 2.5 पर दर्ज किया गया था।

पीएम लेवल 2.5 करता है लंग्स को डैमेज
डॉ. सिंह की मानें तो गर्मियों की तुलना में सर्दियों में हवा में प्रदूषण का लेवल ज्यादा रहता है। इसके पीछे कारण ओस और नमी है। उन्होंने बताया कि एयर क्वालिटी इंडेक्स के अलावा पर्टिक्यूलेट मैटर (पीएम) ज्यादा होने पर यह मरीजों व सामान्य लोगों के लिए घातक है। जयपुर समेत तमाम शहरों में वर्तमान में पीएम लेवल 2.5 माइक्रोन है, जो लंग्स को डैमेज करता है।

पीएम लेवल जितना कम उतना खतरनाक
हवा में पीएम का लेवल जितना कम होगा, वह स्वास्थ्य के लिए उतना ही खतरनाक होता है। 10 माइक्रोन लेवल पर धुल के कण नाक तक ही सीमित रह जाते हैं। इससे छोटे यानी 2.5 पीएम पर धुल के कण नाक, मुंह के जरिए सांस की नली से फेफड़ों (लंग्स) तक पहुंच जाते हैं, जिससे लंग्स की वर्किंग कैपेसिटी इफेक्ट होती है। इसके बाद सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। कई बार सांस नली में नाक से फेफड़े के बीच सूजन के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई घट जाती है।

ब्रेन, हार्ट के लिए घातक है .1 लेवल का पीएम स्तर
विशेषज्ञों की मानें तो अगर किसी शहर के वातावरण में पीएम लेवल .1 पर है, तो वह सबसे ज्यादा खतरनाक है। इस लेवल पर धुल के कण सांस के जरिए लंग्स से होते हुए सीधे ब्लड में जाते हैं, जो ब्रेन और हार्ट के लिए खतरनाक है। इससे हार्ट फेलियर के अलावा ब्रेन में न्यूरो संबंधी बीमारियां होती हैं।

सर्दियों में कोहरे और ओस के समय मॉर्निंग वॉक से बचें
​​​​​​​
विशेषज्ञों की मानें तो वैसे तो अस्थमा रोगियों के लिए सुबह-शाम वॉक करना बहुत अच्छा रहता है। सर्दियों के मौसम में सुबह-सुबह ओस या कोहरे के समय मॉर्निंग वॉक करना ठीक नहीं है। ओस या कोहरे में धुल के कण और पॉल्यूशन हवा में ऊपर न जाकर नीचे ही ओस के कारण रुक जाता है। वॉक के दौरान लोगों के लिए यह घातक साबित हो सकता है। ऐसे में वॉक तब की जाए, जब धूप निकले। धूप में पॉल्युशन का लेवल कम हो जाता है। इसके अलावा सर्दियों में अस्थमा के मरीज बाजार या कहीं भी आए-जाए तो वह मास्क का उपयोग करें।

खबरें और भी हैं…

राजस्थान | दैनिक भास्कर

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments