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Bihar Election 2020: चौथी कक्षा के लड़के से डरी दरभंगा पुलिस, चुनाव में गड़बड़ी फैलाने को लेकर भेजा नोटिस

बिहार पुलिस (प्रतिकात्मक तस्वीर)
– फोटो : ANI

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Bihar Assembly Election 2020: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार पुलिस मुस्तैद है। वह नक्सलियों को पकड़ रही है, विस्फोटक बरामद कर रही है। इन सबके बीच हैरान करने वाली बात यह है कि दरभंगा में बिहार पुलिस ने अपने गांव में कानून और व्यवस्था को बिगाड़ने की आशंका में आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत कक्षा चार के छात्र को नोटिस भेज दिया है।

मामला दरभंगा के बहादुरपुर थाने का है। जहां चौथी क्लास में पढ़ने वाले 11 साल के बच्चे से थाने की पुलिस इतना डर गई कि उसे चुनाव में गड़बड़ी फैलाने की आशंका में 107 का नोटिस भेज दिया है। मामला इतने पर ही समाप्त नहीं हुआ। बल्कि बच्चे को बहादुरपुर थाना पहुंचकर 50 हजार रुपये का जमानत बॉन्ड भी भरना पड़ा। तब जाकर बच्चे को राहत मिली और वह अपने घर पहुंचा। भेजे गए नोटिस में साफ लिखा गया कि पुलिस को शक है कि लड़का चुनाव में गड़बड़ी फैला सकता है।

 

50 हजार रुपये का जमानत बॉन्ड भरना पड़ा
वहीं, बच्चे का परिवार न सिर्फ पुलिस पर सवाल उठा रहा है, बल्कि बच्चे के भविष्य को लेकर भी उन्हें चिंता हो रही है। बच्चा महज चौथी कक्षा में पढ़ रहा है। ऐसे में भला पुलिस को इस बच्चे से क्या खतरा हो सकता है। क्या इतना छोटा बच्चा कोई बूथ लूट सकता है या किसी को डरा धमका भी सकता है।

मंगलवार को इस मामले में बहादुरपुर के थाना प्रभारी अखिलेश कुमार ने कहा कि वह ‘अंडर ट्रेनिंग’ था। वहीं, कार्यवाहक एसएचओ ने इस मामले पर अपनी अज्ञानता व्यक्त की। पुलिस ने कहा कि नाबालिग रायसाहब-पोखर इलाके का निवासी है और उसे संदेह के आधार पर नोटिस दिया गया था कि वह आगामी चुनाव के दौरान गड़बड़ी फैलाएगा।

लड़के की मां ने बताया कि नोटिस मिलने और 50,000 रुपये के बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद पूरा परिवार हैरान है। उन्होंने कहा कि जब वह पुलिस स्टेशन पहुंची, तो उसने अधिकारियों से संदिग्ध व्यक्ति का नाम और पता सत्यापित करने का आग्रह किया, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उसकी याचिका को नजरअंदाज कर दिया।

अंत में, माता-पिता ने 50,000 रुपये के बाॉन्ड पर हस्ताक्षर किए। पुलिस ने कहा कि लड़के के पिता का आपराधिक रिकॉर्ड था, लेकिन क्षेत्र के चौकीदार ने लड़के का नाम खराब पात्रों की सूची में डाल दिया और उसे पुलिस स्टेशन में भेज दिया जहां उसका नाम वांछित व्यक्तियों की सूची में शामिल था। 

पुलिस की लापरवाही से ऐसा हुआ

इस मामले में दरभंगा के एसएसपी बाबू राम का कहना है कि ‘यह पुलिस की लापरवाही से हुआ है।’ हालांकि यह लापरवाही किस स्तर पर हुई है, इसकी जांच कराकर दोषी पुलिस वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उसकी उम्र की पुष्टि करने के लिए लड़के का आधार कार्ड और स्कूल पहचान पत्र एकत्र किया है और उसका नाम वांछित सूची से हटा दिया जाएगा। एसएसपी ने कहा कि उन्होंने इंस्पेक्टर और डीएसपी को निर्देश दिया है कि वे एफआईआर में आरोपी की उम्र का उल्लेख करें और भौतिक सत्यापन करें।

Bihar Assembly Election 2020: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार पुलिस मुस्तैद है। वह नक्सलियों को पकड़ रही है, विस्फोटक बरामद कर रही है। इन सबके बीच हैरान करने वाली बात यह है कि दरभंगा में बिहार पुलिस ने अपने गांव में कानून और व्यवस्था को बिगाड़ने की आशंका में आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत कक्षा चार के छात्र को नोटिस भेज दिया है।

मामला दरभंगा के बहादुरपुर थाने का है। जहां चौथी क्लास में पढ़ने वाले 11 साल के बच्चे से थाने की पुलिस इतना डर गई कि उसे चुनाव में गड़बड़ी फैलाने की आशंका में 107 का नोटिस भेज दिया है। मामला इतने पर ही समाप्त नहीं हुआ। बल्कि बच्चे को बहादुरपुर थाना पहुंचकर 50 हजार रुपये का जमानत बॉन्ड भी भरना पड़ा। तब जाकर बच्चे को राहत मिली और वह अपने घर पहुंचा। भेजे गए नोटिस में साफ लिखा गया कि पुलिस को शक है कि लड़का चुनाव में गड़बड़ी फैला सकता है।

 

50 हजार रुपये का जमानत बॉन्ड भरना पड़ा
वहीं, बच्चे का परिवार न सिर्फ पुलिस पर सवाल उठा रहा है, बल्कि बच्चे के भविष्य को लेकर भी उन्हें चिंता हो रही है। बच्चा महज चौथी कक्षा में पढ़ रहा है। ऐसे में भला पुलिस को इस बच्चे से क्या खतरा हो सकता है। क्या इतना छोटा बच्चा कोई बूथ लूट सकता है या किसी को डरा धमका भी सकता है।

मंगलवार को इस मामले में बहादुरपुर के थाना प्रभारी अखिलेश कुमार ने कहा कि वह ‘अंडर ट्रेनिंग’ था। वहीं, कार्यवाहक एसएचओ ने इस मामले पर अपनी अज्ञानता व्यक्त की। पुलिस ने कहा कि नाबालिग रायसाहब-पोखर इलाके का निवासी है और उसे संदेह के आधार पर नोटिस दिया गया था कि वह आगामी चुनाव के दौरान गड़बड़ी फैलाएगा।

लड़के की मां ने बताया कि नोटिस मिलने और 50,000 रुपये के बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद पूरा परिवार हैरान है। उन्होंने कहा कि जब वह पुलिस स्टेशन पहुंची, तो उसने अधिकारियों से संदिग्ध व्यक्ति का नाम और पता सत्यापित करने का आग्रह किया, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उसकी याचिका को नजरअंदाज कर दिया।

अंत में, माता-पिता ने 50,000 रुपये के बाॉन्ड पर हस्ताक्षर किए। पुलिस ने कहा कि लड़के के पिता का आपराधिक रिकॉर्ड था, लेकिन क्षेत्र के चौकीदार ने लड़के का नाम खराब पात्रों की सूची में डाल दिया और उसे पुलिस स्टेशन में भेज दिया जहां उसका नाम वांछित व्यक्तियों की सूची में शामिल था। 

पुलिस की लापरवाही से ऐसा हुआ

इस मामले में दरभंगा के एसएसपी बाबू राम का कहना है कि ‘यह पुलिस की लापरवाही से हुआ है।’ हालांकि यह लापरवाही किस स्तर पर हुई है, इसकी जांच कराकर दोषी पुलिस वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उसकी उम्र की पुष्टि करने के लिए लड़के का आधार कार्ड और स्कूल पहचान पत्र एकत्र किया है और उसका नाम वांछित सूची से हटा दिया जाएगा। एसएसपी ने कहा कि उन्होंने इंस्पेक्टर और डीएसपी को निर्देश दिया है कि वे एफआईआर में आरोपी की उम्र का उल्लेख करें और भौतिक सत्यापन करें।


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