Army Day 2022: अदम्‍य साहस दिखाने पर भारतीय सैनिकों को मिलते हैं ये 6 बड़े मेडल, जानें हर एक का महत्व

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भारतीय थल सेना इस साल 15 जनवरी को अपना 74वां सेना दिवस (Army Day) मना रही है। इस दिन पूरा देश इन वीर सैनिकों के बहादुरी, अदम्य साहस, शौर्य और उसकी कुर्बानी को याद करता है। इस देश की रक्षा करते हुए अब तक सैकड़ों सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। इनकी बहादुरी और साहस के लिए इन्‍हें प्रतिवर्ष विभिन्‍न वीरता मेडल देकर सम्‍मानित किया जाता है। ये मेडल दो स्‍तर पर दिए जाते हैं, युद्ध के दौरान में वीरता दिखाने पर और शांति के समय में साहसिक कार्य करने पर। ये मेडल गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिया जाता है। वरीयता क्रम में सबसे बड़ा सम्‍मान परमवीर चक्र है, जिसके बाद अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र है। इस आर्टिकल के माध्‍यम से आज हम आपको इन मेडल्स के बारे में पूरी जानकारी देंगे।

​ऐसे तय होते हैं पुरस्‍कार के लिए नाम

देश की रक्षा के लिए अतुलनीय योगदान देने वाले जवानों के नाम वीरता पुरस्‍कारों के लिए तय किए जाते हैं। वीरों के नाम रक्षा मंत्रालय के पास भेजे जाते हैं। मंत्रालय के पास आने वाले सभी नामों पर केंद्रीय सम्‍मान एवं पुरस्‍कार समिति विचार करती है। पूरी प्रक्रिया के बाद यह समिति एक लिस्‍ट तैयार करती है जिसमें वो नाम होते हैं, जिन्‍हें वीरता पुरस्‍कार के लिए चुना गया होता है। यह लिस्‍ट राष्‍ट्रपति को भेजी जाती है। राष्‍ट्रपति की अनुमति के बाद ही इन पुरस्‍कारों की घोषणा की जाती है।

​युद्ध के दौरान दिए जाने वाले मेडल -परम वीर चक्र

युद्ध के दौरान भारत में वीरता के लिए दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता शूरता और बलिदान के लिए दिया जाता है। परम वीर चक्र पहली बार 3 नवंबर, 1947 को भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की चौथी बटालियन के मेजर सोमनाथ शर्मा को ये पुरस्कार दिया गया था। हालांकि इस पुरस्कार को देने की औपचारिक घोषणा 26 जनवरी, 1950 को राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने की थी। खास बात ये है कि इस परमवीर चक्र को मेजर सोमनाथ शर्मा के रिश्‍तेदार और आर्मी अफसर विक्रम खानोलकर की पत्नी सविता खानोलकर ने डिजाइन किया था। बैंगनी रंग के रिबन के साथ मिलने वाले इस मेडल को अब तक 21 वीर सैनिकों को दिया जा चुका है।

महावीर चक्र

अदम्‍य साहस दिखाने पर सैनिकों को मिलने वाला यह दूसरा सबसे बड़ा अवॉर्ड है। यह सम्मान असाधारण वीरता, शूरता और बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मेडल सेना, नौसेना और वायु सेना के सभी रैंक के अधिकारी, प्रादेशिक सेना, रिजर्व बल और किसी अन्य विधिवत सशस्त्र बल के लोगों को दिया जा सकता है। सुरक्षा बलों में से किसी भी विभाग से संबंधित व्यक्ति को इस अवार्ड के लिए युद्ध क्षेत्र में बहादुरी दिखाने के लिए चुना जाता है। 15 अगस्‍त 1950 में यह मेडल पहली बार ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह को मिला था। यह मेडल अब तक 218 वीरों को दिया जा चुका है।

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वीर चक्र

युद्ध में अदम्‍य साहस और वीरता दिखाने वाले सैनिकों को वीर चक्र के लिए चुना जाता है। यह देश का तीसरा सर्वोच्‍च वीरता सम्‍मान है। यह पुरस्कार मरणोंपरांत भी दिया जा सकता है। वीरता पुरस्‍कारों की शुरुआत 26 जनवरी, 1950 को हुई थी। हालांकि यह मेडल भी 15 अगस्त, 1947 से प्रभावित हो गया था। अब तक 1324 लोगों को यह सम्‍मान मिल चुका है। हाल ही में पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान को हवाई युद्ध में मार गिराने वाले ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वीर चक्र देकर सम्मानित किया।

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​शांति काल में दिए जाने वाले मेडल – अशोक चक्र

जब किसी देश से युद्ध नहीं हो रहा होता है, तो शांति काल कहते हैं। भारत ने अपनी आखिरी लड़ाई पाकिस्तान के साथ 1999 में लड़ी थी, लेकिन उसके बाद भी एयर स्ट्राइक, आतंकवादी घटनाएं, सीमा पर घुसपैठ और क्रॉस बॉर्डर फायरिंग जैसी चीजें होती रहती हैं, जिनमें सैनिक असाधारण वीरता दिखाते हैं। इस समय वीरता दिखाने वाले सैनिकों को भी मेडल देकर सम्‍मानित किया जाता है। जिसे शांति काल का मेडल कहते हैं। इसमें अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र प्रमुख हैं।

अशोक चक्र

शांति काल में मिलने वाला यह सबसे बड़ा सम्‍मान है। इसे शांति काल का परम वीर चक्र भी कहा जाता है। इस मेडल ने ब्रिटिश जॉर्ज क्रॉस अवार्ड की जगह ली थी। फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुहास बिस्वास पहले इंडियन थे, जिन्हें ये अवॉर्ड मिला। इस अवार्ड की शुरुआत 4 जनवरी 1952 को हुई थी। उस समय इसे अशोक चक्र क्लास 1 कहा जाता था। हालांकि वर्ष 1967 से इसे अशोक चक्र कहा जाने लगा। अब तक 90 सैनिकों को अशोक चक्र दिया जा चुका है। इसमें 58 को मरणोपरांत यह सम्‍मान मिला।

​कीर्ती चक्र

यह मेडल सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। कीर्ती चक्र को 1952 में अशोक चक्र क्लास 2 नाम दिया गया था। बाद में 1967 में इसे कीर्ति चक्र कर दिया गया। इसे हरे रिबन के साथ पहना जाता है। इसमें दो केसरिया पट्टी होती हैं। अब तक देश में 483 जवानों को कीर्ति चक्र से सम्‍मानित किया जा चुका है।

​शौर्य चक्र

शौर्य चक्र भारत का शांति के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है। पहले इसे अशोक चक्र क्लास 2 कहा जाता था। अब तक देश में 2,095 जवानों को शौर्य चक्र से सम्‍मानित किया जा चुका है।

वीरता के लिए मिलने वाले अन्‍य मेडल

इन मेडल के अलावा भी वीरता दिखाने वाले इन सैनिकों को कई तरह के अवॉर्ड दिए जाते हैं। जिनमें मुख्‍य रूप से सेना पदक, नौसेना पदक, वायुसेना पदक, सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक, विशिष्ट सेवा पदक के अलावा अन्‍य पदक भी शामिल हैं।

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