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33 फीसदी आरक्षण के फैसले से उड़ान भरेंगी बेटियां, हर साल उच्च शिक्षा में होते दो लाख दाखिले

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

Updated Thu, 15 Oct 2020 11:54 PM IST

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पंजाब सरकार के सिविल सेवाओं की सीधी भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के फैसले के बाद यहां की बेटियां अब ऊंची उड़ान भर सकेंगी। हर साल उच्च शिक्षा के लिए दो लाख बेटियां पंजाब विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध 196 कॉलेजों में स्नातक और परास्नातक की शिक्षा हासिल कर रही हैं। सरकार के फैसले से इन बेटियों के अफसर बनने की राह आसान हो गई है।

पंजाब राज्य में लड़कियों की साक्षरता दर बढ़ने के साथ ही उच्च शिक्षा का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों को देखें तो सूबे के अधिकांश विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए पंजाब विश्वविद्यालय में प्रवेश लेते हैं। यहां लगभग 16000 छात्र-छात्राओं में से 80 प्रतिशत विद्यार्थी पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। इसके साथ ही पंजाब विवि से संबद्ध 196 कॉलेजों में हर साल उच्च शिक्षा के लिए 3 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं प्रवेश लेते हैं। 

इनमें 60 प्रतिशत लड़कियां होती हैं। यानी छात्र 1.20 लाख और छात्राएं 1.80 लाख हैं। प्रदेश की सिविल सेवाओं की सीधी भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के फैसले से सूबे की लाखों की संख्या में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहीं बेटियों के अफसर बनने की राह आसान हो गई है।

10 साल में 71.34 प्रतिशत पहुंची साक्षरता दर

पंजाब में महिलाओं की साक्षरता दर में पिछले 10 साल में काफी सुधार हुआ है। 2011 की जनगणना के अनुसार 71.34 प्रतिशत पंजाब की महिलाएं साक्षर हो चुकी हैं। 2001 में यह महिलाओं में साक्षरता की दर 63.4 प्रतिशत थी। हालांकि पुरुषों की साक्षरता दर 81.48 प्रतिशत है।

महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा देने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हमेशा प्रयास किए हैं। पंजाब सिविल सेवाएं नियम 2020 की मंजूरी के बाद महिलाओं के लिए सभी सरकारी नौकरियों में इसका लाभ मिलेगा। पंजाब में यह फैसला एतिहासिक है। – अरुणा चौधरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री, पंजाब

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में 20 फीसदी से भी कम लड़कियां कर रही इंजीनियरिंग

सेक्टर- 12  स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर धीरज सांघी ने बताया कि उनके कॉलेज में इंजीनियरिंग कोर्सेज में 20 प्रतिशत से भी कम लड़कियों की भागीदारी है। दो साल पहले फिर भी ये अनुपात 23 प्रतिशत तक था लेकिन दो साल पहले आईआईटी ने लड़कियों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण देना शुरू कर दिया। 

इसके साथ ही पिछले साल लड़कियों की इंजीनियरिंग में कम भागीदारी देख एनआईटी ने भी लगभग 17 प्रतिशत लड़कियों के लिए आरक्षण रखा। जिससे वहां लड़कियों का अनुपात थोड़ा ठीक हुआ लेकिन अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में भागीदारी कम ही है। इसका एक बड़ा कारण है कि लड़कियों को 12वीं के बाद जेईई की कोचिंग लड़कों के अनुपात में बहुत कम मिलती है, जिससे वे ज्यादा अच्छे अंक नहीं हासिल कर पातीं। यही अनुपात स्कूल में 12वीं तक अच्छा रहता है, टॉपर्स में लड़कियों का अनुपात लगभग 50 प्रतिशत तक रहता है।

पंजाब सरकार के सिविल सेवाओं की सीधी भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के फैसले के बाद यहां की बेटियां अब ऊंची उड़ान भर सकेंगी। हर साल उच्च शिक्षा के लिए दो लाख बेटियां पंजाब विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध 196 कॉलेजों में स्नातक और परास्नातक की शिक्षा हासिल कर रही हैं। सरकार के फैसले से इन बेटियों के अफसर बनने की राह आसान हो गई है।

पंजाब राज्य में लड़कियों की साक्षरता दर बढ़ने के साथ ही उच्च शिक्षा का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों को देखें तो सूबे के अधिकांश विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए पंजाब विश्वविद्यालय में प्रवेश लेते हैं। यहां लगभग 16000 छात्र-छात्राओं में से 80 प्रतिशत विद्यार्थी पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। इसके साथ ही पंजाब विवि से संबद्ध 196 कॉलेजों में हर साल उच्च शिक्षा के लिए 3 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं प्रवेश लेते हैं। 

इनमें 60 प्रतिशत लड़कियां होती हैं। यानी छात्र 1.20 लाख और छात्राएं 1.80 लाख हैं। प्रदेश की सिविल सेवाओं की सीधी भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के फैसले से सूबे की लाखों की संख्या में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहीं बेटियों के अफसर बनने की राह आसान हो गई है।

10 साल में 71.34 प्रतिशत पहुंची साक्षरता दर
पंजाब में महिलाओं की साक्षरता दर में पिछले 10 साल में काफी सुधार हुआ है। 2011 की जनगणना के अनुसार 71.34 प्रतिशत पंजाब की महिलाएं साक्षर हो चुकी हैं। 2001 में यह महिलाओं में साक्षरता की दर 63.4 प्रतिशत थी। हालांकि पुरुषों की साक्षरता दर 81.48 प्रतिशत है।


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