Wednesday, December 8, 2021
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स्वच्छ सर्वेक्षण 2021: स्मार्ट सिटी में शामिल होकर भी सफाई में छोटे शहरों से पिछड़ा जालंधर, कभी देश में था 28वां स्थान

जालंधर18 घंटे पहले

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विकासपुरी के बाहर गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग करना और गीले कूड़े से खाद बनाने का प्रोजेक्ट लगाया, लेकिन कूड़ा डंप से बाहर सड़क तक फैला रहता है।

  • कूड़ा सेग्रिगेशन न के बराबर, 119वें से 161वें रैंक पर लुढ़का अपना शहर
  • खराब परफाॅर्मेंस- कूड़ा ढोने वाली पुरानी मशीनरी, बायोमाइनिंग व स्मार्ट सिटी की योजनाओं में देरी पिछड़ने का कारण

स्मार्ट सिटी में शामिल होने के बाद 948 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर होने के बावजूद जालंधर साफ नहीं हो सका है। ताजा स्वच्छ भारत अभियान के सर्वे में जालंधर का रैंक 119 से बढ़कर 161 पर आ गया, जबकि जब 2016 में पहला सर्वे हुआ तो जालंधर 28वें रैंक पर था। इसी तरह 2018 में जालंधर 166वें रैंक पर था। अब जैसे-जैसे नए शहर जुड़ रहे हैं तो कंपीटिशन मुश्किल होने से जालंधर की हालत खराब हो गई है।

नए सुलभ शौचालय बनने से इससे जुड़ी गंदगी की दिक्कत तो दूर हो गई है, लेकिन कूड़े की सेग्रिगेशन में फेल होने से जालंधर की परफार्मेंस में सुधार नहीं हो रहा है। दिल्ली से क्वालिटी कौंसिल ऑफ इंडिया की टीम जालंधर आकर दो महीने पहले सड़कों के किनारे लगे कूड़े के ढेरों की फोटोग्राफी करके गई थी, ये फोटो खींचते ही जीओ टैगिंग साॅफ्टवेयर से नेशनल सर्वे में रिकाॅर्ड हो जाती है। इसी कारण खराब हुए हालात का खुलासा हुआ है। जालंधर के हेल्थ अफसर डाॅ. श्रीकृष्ण दिल्ली के विज्ञान भवन में रैंकिंग समारोह में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने 161 वें रैंक की पुष्टि की है।

होशियारपुर के रैंक में सुधार- 138वां रैंक मिला, जबकि फगवाड़ा ने इनोवेशन अवाॅर्ड जीता

जालंधर के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी योजना 61 करोड़ रुपए से वरियाणा डंप के 25 साल पुराने कूड़े को बायोमाइनिंग से खत्म करने की है। इसके बाद जोनल लेवल पर गीले-सूखे कूड़े को अलग-अलग करके ठिकाने लगाना है, लेकिन योजना में 4 साल देरी हुई। इससे सिटी की सड़कों पर कूड़े के ढेर लग रहे हैं। इन्हीं के कारण सफाई मैं रैंकिंग लगातार खराब हो रही है। जालंधर को 2802 अंक ही मिले, जो कि टारगेट से केवल 50 फीसदी हैं। जबकि पड़ोसी होशियारपुर 2931 अंक लेकर 138वें रैंक पर रहा। फगवाड़ा ने इनोवेशन अवाॅर्ड जीता है।

सफाई में सुधार के प्रोजेक्ट धीमे

  • 50 बड़े कूड़ा उत्पादक खुद कूड़े से खाद बना रहे हैं, लेकिन ये संख्या कम है। इसी कारण शहर में कूड़े के ढेर लग रहे हैं।
  • 50 से ज्यादा पब्लिक टायलेट बने हैं। इससे सफाई में सुधार हुआ लेकिन संख्या कम।
  • निगम के पास कूड़ा ढोने वाली मशीनरी पुरानी है, जिससे सिटी में रोजाना 400 मीट्रिक टन कूड़ा उठाने में दोपहर हो जाती है।
  • स्मार्ट सिटी की योजनाएं लेट होने से दिक्कत। कूड़े को प्रोसेस करने वाले कैपेस्टर खरीदने में देरी ही रही है। बायोमाइनिंग में देरी हुई।
  • सिटी में विकासपुरी, फोलड़ीवाल, रामामंडी में कूड़े से खाद बनाने के प्रोजेक्ट चालू करने की स्पीड कम रही।

नगर निगम की छवि धूमिल

2016 में पहली बार सर्वे शुरू हुआ तो जालंधर को 28वां रैंक मिला था। आज सिटी में नकोदर रोड, बिस्त दोआब नहर, प्रताप बाग, लाडोवाली रोड में सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर हैं। सिटी में हर माह मशीनरी, वेतन आदि पर करोड़ रुपए खर्च होते हैं, लेकिन गंदगी बेकाबू है।

बायोमाइनिंग का काम शुरू होने जा रहा, मशीनरी खरीद रहे- मेयर

मेयर जगदीश राजा राजा ने बताया कि बायोमाइनिंग का काम शुरू होने जा रहा है। नई मशीनरी भी खरीदी जा रही है। इन दो प्रोजेक्ट से बड़ा सुधार होगा।

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पंजाब | दैनिक भास्कर

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