Wednesday, December 8, 2021
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स्वच्छता सर्वेक्षण में खराब प्रदर्शन: स्मार्ट सिटी शिमला की रैंकिंग 65 से 102 पर पहुंचीं, शहर में सबसे खराब रहा सिटीजन फीडबैक, गारबेज सेग्रिगेशन भी बेहतर नहीं

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शिमला3 घंटे पहलेलेखक: जाेगेंद्र शर्मा

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शिमला में जंगलों में लोग कूड़ा फेंक रहे हैं। नवबहार में नाले में इस तरह का मंजर है।

स्मार्ट सिटी का दर्ज मिलने के बाद शिमला शहर की चेहरा सुधरना चाहिए था। लेकिन हर साल हाेने वाले स्वछता सर्वेक्षण में एक बार फिर साबित कर दिया है कि शिमला शहर काे स्मार्ट और साफ सुथरा बनाने के काम की जिन पर जिम्मेदारी थी वाे अपना काम कतई भी जिम्मेदारी से नहीं कर पाए। केंद्र सरकार के हाउंसिंग एंड अर्बन एफेयर्स मंत्रालय 2021 की ताजा रिपाेर्ट शिमला काे स्मार्ट और साफ सुथरा बनाने वालाें के कामकाज की कलई एक बार फिर खाेल गई है।

देशभर में एक से 10 लाख की आबादी वाले शहराें की रैंकिंग में शिमला पिछले साल के मुकाबले 37 अंकाें की रैंकिंग खाेकर पहले 100 में भी शामिल नहीं हाे पाया है। अब शिमला देशभर में स्वच्छता काे लेकर 102वें पायदान पर गिर गया है। हालत ये है कि शिमला शहर के लाेग ही इस शहर काे संभालने वालाें के कामकाज से कतई भी खुश नहीं है।

इस स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए जरूरी मानकाें में सिटीजन फीडबैक भी एक अहम फैक्टर था, लेकिन जब सर्वेक्षण के दाैरान लाेगाें की राय जानी गई, ताे सिटीजन फैक्टर ने लाेगाें ने शहर काे संभालने वालाें के कामकाज काे पूरी तरह से नकार दिया। सिटीजन फीडबैक से शिमला शहर की बहुत ही खराब राय सामने आई है। सिटीजन बीडबैक में शिमला काे 1800 में से 927 ही नंबर ही मिले हैं। अंदाजा लगा सकते हैं कि राजधानी शिमला काे स्मार्ट और साफ सुथरा बनाने के लिए किस तरह का कामकाज हाे रहा है।

स्मार्ट सिटी में कुछ नहीं हाे रहा है
स्मार्ट सिटी में कुछ नहीं हाे रहा है। हालत ये है कि वर्ष 2017 में स्मार्ट सिटी प्राेजेक्ट काे शुरू किया गया। जबकि पांच साल बीत जाने के बाद भी महज डंगें ही लगाए गए हैं। शिमला काे स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कुल 2905 कराेड़ रुपए मिलने हैं। लेकिन ये दर्जा मिलने के 5 साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी शिमला काे इस प्राेजेक्ट में मिलने वाली ग्रांट का 7 फीसदी हिस्सा भी जाे मिला है, वाे ऐसे प्राेजेक्ट पर खर्च किया जा रहा है जाे स्मार्ट सिटी प्राेजेक्ट का हिस्सा ही नहीं थे।

सेग्रिगेशन में हालत खस्ता, लगातार पिछड़ते गए
सेग्रिगेशन व्यवस्था शहर में सही ढंग से लागू हाे, इसके लिए निगम ने सभी सैहब कर्मचारियाें काे अलग-अलग नीले और हरे रंग के बैग दिए थे। लेकिन वक्त बीतने के साथ ही इस व्यवस्था काे भूल गए। शहर के कई लाेग भी सेग्रिगेशन व्यवस्था काे फॉलाे नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि जंगलों में लोगों कूड़ा फेंक रहे है, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। नगर निगम ने इसके लिए खासताैर पर सैनिटरी इंस्पेक्टर और अधिकारियाें की ड्यूटियां लगाई थी, लेकिन तमाम प्रयासाें के बाद भी यह व्यवस्था सही ढंग से नहीं चली। नगर निगम ने निर्देश दिए थे कि हर घर से अब गीला और सूखा दो अलग-अलग तरह का कूड़ा उठेगा, जबकि ये व्यवस्था लागू ही नहीं हाे पाई।

कोविड के कारण पिछड़े
इस बार काेविड के कारण टीमाें काे अलग अलग जगह ड्यूटियां लगाई गई थी। इस कारण हम पिछड़े हैं। अब आने वाले दिनाें में हम सफाई व्यवस्था काे और बेहतर ढंग से करने का प्रयास करेंगे। अगली बार अच्छी रैंक मिले इसका प्रयास करेंगे।
-सत्या काैंडल, मेयर, नगर निगम शिमला

सफाई व्यवस्था करेंगे दुरुस्त
गीला सूखा कूड़ा अलग अलग करने के लिए हमारे पास प्लांट नहीं हैं। भरयाल में सिर्फ सूखा कूड़े काे ठिकाने लगाने का ही काम हाेता है। ऐसे में अब प्रयास करेंगे कि आने वाले दिनाें में हम सफाई व्यवस्था काे और दुरूस्त करें।
-चेतन चाैहान, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम शिमला

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हिमाचल | दैनिक भास्कर

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