सचिन जीआईडीसी गैस कांड: मुंबई के कचरे को अंकलेश्वर से सूरत लाया गया, 4 रुपए प्रति लीटर बचाने 25 हजार ली. जानलेवा केमिकल खुले में फेंका

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सूरत9 मिनट पहले

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इसी नाले में फेंका गया था खतरनाक केमिकल, पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

सचिन जीआईडीसी स्थित विश्वप्रेम डाइंग मिल के पास के नाले में खतरनाक केमिकल फेंके जाने के बाद 6 मजदूरों की हुई मौत मामले में सूरत क्राइम ब्रांच ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान आशीष गुप्ता, प्रेम प्रकाश गुप्ता, जय प्रताप रामकिशोर और विशाल उर्फ छोटू यादव को के रूप में हुई है। इस पूरे ऑपरेशन में सूरत शहर पुलिस, बड़ौदा पुलिस और भरूच पुलिस शामिल थी।

पुलिस ने बताया कि केवल ₹4 रुपए प्रति लीटर बचाने के लिए आरोपियों ने 6 लोगों की जान ले ली। अगर यह केमिकल किसी सीमेंट या टेक्सटाइल कंपनी को दे दे तो उसके बदले उन्हें ₹4 प्रति लीटर देना पड़ता जो उन्होंने बचा लिया और केमिकल को खुले जगह पर फेंक दिया। पुलिस को जानकारी मिली थी कि केमिकल वेस्ट गैरकानूनी तरीके से जयप्रताप और विशाल के माध्यम से मंगाया गया था।

इसके बाद ड्राइवर सुरेंद्र सिंह और प्रेम प्रकाश गुप्ता के माध्यम से सूरत जीआईडीसी ले जाकर इसको डंप करवाया गया था। जांच में पता चला कि टैंकर के अंदर सोडियम हाइड्रोसल्फाइड नाम का केमिकल था। इस टैंकर को अंकलेश्वर से लाया गया था। हालांकि टैंकर के अंदर जो केमिकल था वह मुंबई की एक हिकल नाम की कंपनी की है जो फार्मा कंपनी के साथ जुड़ी हुई है।

थाेड़े से मुनाफे के लिए दूसरों की जिंदगी से करते हैं खिलवाड़
हिकल कंपनी ने केमिकल को ₹14 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से दिया। टैंकर में 25000 लीटर केमिकल था। इससे एनवायरो कंपनी को एक टैंकर पर 3.50 लाख रु. मिले थे। सीमेंट-टेक्सटाइल कंपनियों में इन केमिकल का उपयोग होता है। लेकिन बदले में कंपनियों को ₹4 रुपए प्रति लीटर देना होता था। इसे ही बचाने के चक्कर में 6 की जान चली गई।

सोडियम हाइड्रोसल्फाइड पानी में मिल जानलेवा गैस बन गया
एनवायरोकेम सर्विस प्रा. लिमिटेड के डायरेक्टर समीर कुमार ने बताया कि सोडियम हाइड्रोसल्फाइड पानी में मिलकर जहरीली गैस उत्पन्न करता है। यह केमिकल जैसे ही पानी के संपर्क में आता है, तुरंत ही आग लग जाती है। इससे वहां आसपास की हवाएं जहरीली हो गई होंगी। संभवत: यही हवा उन मजदूरों के लिए काल बन गया।

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चंडीगढ़ | दैनिक भास्कर

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