संक्रमण के खतरे के बीच परम्परा का निर्वहन: बिना स्वीकृति के धनोप में दड़ा महोत्सव का आयोजन, बिना सुरक्षा हजारों लोग जुटे, अधिकारियों ने लगाया जुर्माना

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भीलवाड़ा9 मिनट पहले

खेल से पूरे साल के मौसम का लगात�

भीलवाड़ा जिले की फूलिया कलां तहसील क्षेत्र के धनोप गांव में मकर सक्रांति को दड़ा खेल खेला गया। यहां लोगों ने कोरोना गाइडलाइन को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया। बिना सुरक्षा हजारों की भीड़ गांव में इक्कठा हुई। सबसे बड़ी बात यह थी कि जब यह आयोजन हो रहा था। तब किसी भी अधिकारी का ध्यान इस पर नहीं गया। आयोजन के बाद जब अधिकारियों को पता चला तो एक पर जुर्माना लगाया गया। गांव मे रियासत काल से दड़ा महोत्सव आयोजन की परंपरा चली आ रही है। मकर संक्रांति 14 जनवरी को महोत्सव में करीब 14 किलो वजनी इस दड़ा (गेंद) को ग्रामीणों का हुजूम रस्सी से बांधकर खींचता है। इस खेल से ग्रामीण पूरे वर्ष के मौसम का अनुमान लगाते। शुक्रवार को यह खेल फिर से खेला गया। कोरोना गाइडलाइन से पहले इस खेल में हजारों की संख्या में लोग इक्कठा हुए। ग्रामीणों द्वारा पटेल की मौजूदगी में दड़ा को गढ़ से निकालकर चौक में लाया जाता गया। करीब दो घंटे तक लगातार लोग इस खेल का आनंद उठाते रहे। इसके बाद अंत में पटेलों ने बताया कि इस साल अकाल पड़ने की बात कहीं।

14 किलो की गेंट के साथ खेलते है ग्रामीण।

दो टीम करती है जोर आजमाइश

इस खेल का शुभारंभ गांव में ठाकुर सत्येंद्र सिंह ने की। दो टीमों ने इन दड़े को अपनी अपनी तरफ खींचने की कोशिश की। अंत में दड़ा समय पूरा होने पर फकीर मोहल्ले में गया। जहां पटेल ने खेल समाप्ति की घोषणा की। दड़ा फकीर मोहल्ले की तरफ जाने से परिणाम अकाल का माना गया। ग्रामीणों ने बताया कि 35 वर्ष बाद दड़ा फकीर मोहल्ले में पहुंचा। गत वर्ष खेल में दड़ा हवाला की तरफ गया था। जिससे सुकाल के संकेत मिले।

क्रेडिट – कमलेश शर्मा, फूलिया कला

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राजस्थान | दैनिक भास्कर

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