Wednesday, December 8, 2021
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मौसम की बेरुखी: सीजनल बीमारियों के बाद अब सूरत में 5 साल तक के बच्चों में टाइफाइड फैल रहा, रोजाना आ रहे 150 से ज्यादा मरीज

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सूरत3 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक फोटो।

शहर में सीजनल बीमारी के बाद अब 5 साल के बच्चो में टाइफाइड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सिविल, स्मीमेर और प्राइवेट अस्पतालों में रोजाना 150 से अधिक मरीज आ रहे हैं। 8 फीसदी मामले में बच्चों को अस्पताल में भर्ती करके टाइफाइड का इलाज किया जा रहा है। बीमार बच्चों का कम से कम 14 दिनों तक इलाज होता है। बच्चों को एक सप्ताह से अधिक दिनों तक तेज बुखार होता है। डॉक्टर उन्हें सेफ्ट्रीएक्जोन, एजिथ्रोमाइसीन और ओपपैक्स के इंजेक्शन 7 दिनों तक लगातार लगा रहे हैं।

बुखार उतरने के बाद एक सप्ताह तक बच्चों को खाने की दवा दी जाती है। बच्चों को 72 घंटे तक बुखार दोबारा नहीं होता है तो उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह एक गंभीर बीमारी है। टाइफाइड साल्मोनेला एन्टेरिका सेरोटाइप टाइफी बैक्टीरिया से होता है। साल्मोनेला पैराटाइफी बैक्टीरिया से भी फैलता है। यह बैक्टीरिया पानी और खाने के साथ शरीर के अंदर जाता है। बच्चे खाने-पीने के मामलों में ज्यादा लापरवाह होते हैं, इसलिए टाइफाइड के शिकार हो जाते हैं।

सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग की एचओडी डॉ. संगीता ने बताया सीजनल फीवर के मामले अधिक आ रहे हैं। सिविल में टाइफाइड के केस रोज आ रहे हैं। हालांकि अभी स्थित नियंत्रण में है। बुखार होते ही मरीज अस्पताल आता है तो 5 से 7 दिन में इलाज से स्वस्थ हो जाता है। कई बार मरीज तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद इलाज के लिए आते हैं। ऐसे मरीजों को ठीक होने में दो सप्ताह लग जाते हैं। मरीजों को 72 घंटे ऑब्जर्वेशन में रखा जाता है। दोबारा बुखार न होने पर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है। टाइफाइड होने पर शुरुआत में 5 से 6 दिनों तक लगातार तेज बुखार होता है। मरीजों को 72 घंटे ऑब्जर्वेशन में रखा जाता है

डॉक्टरों की राय: टाइफाइड के केस और बढ़ने की संभावना
डॉ. संगीता ने बताया कि आमतौर पर गर्मी और बरसात के मौसम में टाइफाइड के केस तेजी से बढ़ते हैं। हालांकि अब सर्दी का माैसम शुरू हो गया है, इसके बावजूद टाइफाइड के मरीज अधिक आ रहे हैं। मौजूदा स्थित को
देखते हुए आने वाले दिनों में केस और बढ़ने की संभावना है। लोग सामान्य लक्षण को भी नजरअंदाज न करें। बच्चों के मामलों में कोई भी लापरवाही न बरतें। बुखार होते ही डॉक्टर से संपर्क करें। मरीजों का सही समय पर
इलाज करवाएं।

ये है परेशानी: ब्लड कल्चर रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग रहे
टाइफाइड की जांच दो प्रकार से होती है। शुरुआती पांच दिनों में विडाल टेस्ट करवाया जाए तो उसकी रिपोर्ट कुछ घंटो में ही आ जाती है, पर इसमें टाइफाइड की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आती है। इसलिए शुरुआती दिनों में इसकी
रिपोर्ट करवाना ठीक नहीं है। यही कारण है कि डॉक्टर ब्लड कल्चर रिपोर्ट करवाते हैं, यह रिपोर्ट कम से कम तीन से चार दिन बाद आती है। इस रिपोर्ट में पहले हफ्ते में हुई बीमारी की पुष्टि हो जाती है। रिपोर्ट आने में देरी की
वजह से मरीजों का ठीक से इलाज नहीं हो पाता है। दोनों रिपोर्ट माइक्रोबायोलॉजी विभाग में होती है। यहां पहले से ही कोरोना और अन्य वायरस बीमारियों की जांच हो रही है। वर्क लोड होने की वजह से टाइफाइड की रिपोर्ट भी
देरी से आ रही है। इससे मरीजों का इलाज करने में देरी हो रही है।

स्थिति: समय पर इलाज से 5 दिनों में ठीक हो जाते हैं मरीज
डॉक्टरों का कहना है कि टाइफाइड का समय पर इलाज करने से मरीज 5 दिन में ठीक हो जाते हैं। हालांकि शुरुआती दिनों में बीमारी की पुष्टि नहीं हो पाती है। यही कारण है कि एक-दो सप्ताह में केस बिगड़ जाते हैं। कुछ
मामलों में टाइफाइड जानलेवा भी हो जाता है। कई बच्चों के सीने में जलन, पेट दर्द होता है। कभी-कभी बुखार स्थिर भी हो जाता है। मौसम की बेरुखी से सीजनल बीमारियों के बाद अब शहर में टाइफाइड फैलने लगा है। लोगों
काे सावधानी बरतने की जरूरत है।

ऐसे लक्षण मिलें तो अस्पताल जाएं

  • कफ
  • सिरदर्द
  • पेट में दर्द
  • शरीर में दर्द
  • जी मिचलाना
  • भूख न लगना
  • दस्त और कब्ज
  • 104 डिग्री तक बुखार

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गुजरात | दैनिक भास्कर

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