मान्यताएं: 17 जनवरी से शुरू हो रहे हैं माघ मास के स्नान, इस माह में पवित्र नदियों में देवता भी करते हैं स्नान

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21 मिनट पहले

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सोमवार, 17 जनवरी को पौष मास की पूर्णिमा है, इसी दिन से माघ मास के स्नान शुरू हो रहे हैं जो कि 16 फरवरी तक चलेंगे। इस माह में पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार मान्यता है कि माघ मास में पवित्र नदियों में स्नान के लिए देवता भी पृथ्वी पर आते हैं। इस वजह से माघ मास में नदी स्नान का महत्व काफी अधिक है। खासतौर पर प्रयागराज में माघ स्नान के लिए देशभर से भक्त पहुंचते हैं।

मान्यता है कि भगवान व्रत, दान और तपस्या से भी ज्यादा माघ पूर्णिमा पर किए गए तीर्थ स्नान और मंत्र जाप से प्रसन्न होते हैं। पद्मपुराण के अनुसार पाप कर्मों से मुक्ति और भगावन की कृपा पाने के लिए हर भक्त को माघ स्नान जरूर करना चाहिए है।

काशी की गंगा से भी ज्यादा प्रयागराज के गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम में स्नान करने का महत्व है। संगम के जल में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदित्य, गंधर्व, यक्ष, किन्नर, पार्वती-लक्ष्मी सभी देवियां भी स्नान करने आती हैं।

अगर कहीं दो नदियों के संगम में स्नान किया जाता है तो वह स्नान भी अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला है। नर्मदा नदी माघ स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। सरयू, सिंधु, शिप्रा और गोदावरी जैसी नदियों में किया गया स्नान मोक्ष प्रदान करता है।

अगर तीर्थ स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान करते समय तीर्थों का और पवित्र नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, शिप्रा, सरयू, सिंधु, गोदावरी, कावेरी, अलकनंदा, भागीरथी का ध्यान करना चाहिए।

स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करना चाहिए। किसी गौशाला में हरी घास का दान करें। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। कंबल, कपड़े, जूते, रत्न और धन का दान करना चाहिए।

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जीवन मंत्र | दैनिक भास्कर

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