भास्कर पड़ताल: डीडीनगर, शंकर नगर, चौबे कॉलोनी समेत शहर के केवल 9 इलाकों में ही हजार से ज्यादा मरीज; जानिए-ज्यादा संक्रमित कहां से निकले

0
21

  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Raipur
  • More Than A Thousand Patients In Only 9 Areas Of The City Including Didinagar, Shankar Nagar, Choubey Colony; Know Where The Most Infected Came Out

रायपुर3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

राजधानी में करीब 5 हजार एक्टिव केस।

केवल एक हफ्ते की छोटे से वक्त में राजधानी में कोरोना संक्रमण की जद में 45 से अधिक इलाके संक्रमण की जद में आ गए हैं। रविवार देर रात तक रायपुर में सक्रिय मरीज यानी एक्टिव केस का आंकड़ा 5 हजार के करीब पहुंच गया है। सक्रिय मरीजों का 25 फीसदी से अधिक हिस्सा यानी एक हजार से अधिक केस केवल डीडीनगर, अशोका रत्न शंकर नगर, चौबे कॉलोनी, सड्डू, टाटीबंध, देवपुरी, आफिसर्स कॉलोनी देवेंद्र नगर और सिविल लाइंस में है।

हालांकि डाक्टरों का कहना है कि इन इलाकों में जागरुकता की वजह से जांच करवाने वालों की संख्या ज्यादा है, इसलिए संक्रमित भी अधिक निकल रहे हैं। शहर के ट्रेंड की तरह यहं भी 98 फीसदी संक्रमित होम आइसोलेशन में ही हैं। राजदानी में जनवरी की शुरूआत में 216 एक्टिव मरीज दर्ज किए गए थे। उसके बाद से संक्रमितों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और पिछले एक हफ्ते से काफी तेज है। भास्कर की पड़ताल के मुताबिक केवल पिछले 9 दिन में एक्टिव मरीजों की संख्या 22 गुना से अधिक बढ़ गई है।

हालांकि दिसंबर के आखिरी हफ्ते में जहां महिला मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही थी, वो अब नहीं दिखाई दे रही है। रायपुर में बीते एक हफ्ते में महिला और पुरुष कोविड मरीजों का अनुपात 40 : 60 का हो गया है, अर्थात महिलाओं की तुलना में पुरुषों के संक्रमित होने की दर डेढ़ गुना पर पहुंच गई है। जबकि दिसंबर में महिला और पुरुष संक्रमितों की संख्या तकरीबन बराबर (महिलाएं 49 प्रतिशत) थी।

अभी यहां सर्वाधिक केस

  • डीडी नगर – 225+
  • अशोका रत्न – 175+
  • टाटीबंध – 162+
  • शंकर नगर – 140+
  • देवपुरी – 137+
  • चौबे कॉलोनी – 125+
  • सड्डू – 110+
  • सिविल लाइंस – 100+
  • आफिसर्स काॅलोनी – 92+

स्टिकर लगे मकानों से अब वैसा परहेज नहीं, जैसा था
भास्कर टीम ने ऐसे इलाकों का जायजा लिया, जहां अभी मरीज ज्यादा संख्या में हैं। जोन क्रमांक 8 के कोटा इलाके में संक्रमितों के घर के आसपास रह रहे लोगों के मुताबिक अब पहले की तरह कोई डर जैसी स्थिति नहीं है। पहले लोग स्टीकर लगे मकानों के पास जाने से घबरा जाते थे, लेकिन अब वैसा कोई माहौल नहीं है। हालांकि सावधानी के तौर पर लोग संक्रमितों के घरों के पास से आवाजाही में परहेज कर रहे हैं।

नगर निगम के जोन-8 के स्वास्थ्य अधिकारी आत्मानंद के मुताबिक पॉजिटिव आए लोगों के घरों के आसपास ब्लीचिंग पाउडर, सैनिटाइज जैसी गतिविधि के अलावा स्टीकर के साथ रिबन भी लगाई जा रही है, ताकि लोग सावधान रहें। पहले लोग मकानों में स्टीकर लगाने पर एतराज जताते थे, लेकिन अब वे ऐसा नहीं करते। हालांकि इक्का-दुक्का लोगों ने मकानों से स्टिकर अब भी निकाले हैं।

आरटीपीसीआर 87 प्रतिशत

ओमिक्रॉन वैरिएंट के बाद से रायपुर में आरटीपीसीआर टेस्टिंग बढ़ा दी गई है। अभी की स्थिति में 87 प्रतिशत तक आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा रहे हैं। इसके चलते बहुत से लोगों को रिपोर्ट एक से दो दिन बाद मिल पा रही है। नए मिल रहे संक्रमितों में से लगभग 70 प्रतिशत मरीज 21 से 30 और 31 से 40 साल के बीच की उम्र वाले हैं। इनके अलावा बच्चों में संक्रमण के मामले भी अधिक संख्या में देखे जा रहे हैं। रायपुर में 0 से 17 के एजग्रुप में अब तक 500 से अधिक बच्चे पॉजिटिव हो चुके हैं।

घने शहर में 52 और आउटर में बन गए 55 कंटेनमेंट जोन
दिसंबर के अंतिम हफ्ते में कोरोना संक्रमितों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही थी, तब राजधानी में केवल 5 माइक्रो कंटेनमेंट जोन थे, लेकिन 1 से 9 जनवरी तक इनकी संख्या बढ़कर 52 हो गई है। सबसे ज्यादा 10 कंटेनमेंट जोन शहर के आउटर वाले जोन-10 में बनाए गए हैं। इसके अलावा आुटर की तहसीलों में भी ज्यादा संक्रमित मिलने के कारण 55 नए कंटेनमेंट जोन बन चुके हैं।

प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार जिन घरों में 2 और मोहल्लों में 5 से ज्यादा कोरोना मरीज मिल रहे हैं, वहां कंटेनमेंट जोन बनाया जा रहा है। कंटेनमेंट जोन में रहनेवालों की सुविधा के लिए प्रशासन ने अफसरों की नियुक्ति करने के साथ उनके फोन नंबर भी जारी कर दिए हैं। लोगों से कहा गया है कि केवल हेल्थ इमरजेंसी के अलावा किसी भी काम के लिए वे घरों से बाहर न निकलें।

जोन-3 में एक भी नहीं
इधर, प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी में केवल जोन-3 ही ऐसा है, जहां एक भी कंटेनमेंट जोन नहीं है। हालांकि वहां इक्का-दुक्का कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं, लेकिन कंटेनमेंट जोन बनाने जैसे हालात नहीं हैं।

खबरें और भी हैं…

छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here