Monday, November 29, 2021
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भास्कर पड़ताल: गीला-सूखा कचरा अलग नहीं करना और सुबह गाड़ियों को नहीं देना… सिर्फ यही नहीं होता तो टाॅप-3 में रहती राजधानी

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रायपुरएक घंटा पहले

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इंदौर से 807.14 नंबर पीछे क्योंकि गार्बेज-फ्री में ही सीधे 500 नंबर कम

स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 में रायपुर ने देश के छठवें सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल कर बड़ी उपलब्धि पाई क्योंकि पिछले साल ही राजधानी की रैंकिंग 21वीं थी। वर्ष 2016 के सर्वेक्षण में 73 शहरों मंे रायपुर 68वीं रैंकिंग पर था, लेकिन लगातार सुधार की नतीजा है कि 2021 के सर्वे में 4,320 शहरों में से राजधानी देश की टॉप-10 सूची में शामिल हो गई। राजधानी को स्वच्छ सर्वे की हर कैटेगरी में पूरे नंबर मिले हैं, लेकिन केवल सर्टीफिकेशन में 700 नंबरों से पिछड़ने के कारण शहर को छठवीं पोजिशन मिली।

भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई कि दो ही मुद्दों पर शहर के नंबर कम हुए हैं। पहला, शहर में गीले और सूखे कचरे को अलग करने का सिस्टम ग्रासरूट लेवल यानी लोगों के स्तर पर भी नियंत्रित नहीं है, इसलिए इस वर्ग में 200 नंबरों की कमी आ गई। दूसरा मामला सुबह निकली कचरा गाड़ियों के लौटने के बाद यानी दोपहर में कचरा फेंकने का है, जिस वजह से शहर में कई जगह कचरा नजर आता है और केवल इसी में राजधानी 500 नंबरों से पिछड़ गई। इंदौर समेत जिन पांच शहरों से रायपुर पीछे रहा, उसमें यही दो कारण सामने आए क्योंकि बाकी सभी मुद्दों पर इंदौर समेत पांच शहरों को उतने ही नंबर मिले, जितने रायपुर को।

स्वच्छता सर्वेक्षण में रायपुर को तीन अवार्ड मिले। यह बड़ी बात है। इसके बावजूद खामियों को लेकर पड़ताल की गई तो उसमें बहुत ही मामूली चूक सामने आई है। केंद्र सरकार अगर स्वच्छ भारत मिशन पर कायम रही तो अगले एक दशक तक स्वच्छता सर्वेक्षण रहेगा। रायपुर के जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यह दोनों चूक सुधार ली गईं तो इस वजह से न केवल राजधानी बिलकुल साफ-सुथरी हो जाएगी, बल्कि नंबर-1 तक भी पहुंचा जा सकता है।

इस तरह हम पिछड़े रैंकिंग में

1. गीले-सूखे कचरे को अलग करने में 291 नंबर पीछे हुए
इस कैटेगरी में शहर को 2109 अंक मिले, जो कुल अंकों का 87.88 फीसदी है। इसमें साल के तीन तिमाहियों में आनलाइन दस्तावेज जमा कराए गए। शहर में कचरा गीले और सूखे के रूप में अलग-अलग किया जा रहा है या नहीं, कचरे की प्रोसेसिंग की जा रही है या नहीं, कचरा डिस्पोज करने का क्या सिस्टम और सड़कें-नालियों की सफाई का सिस्टम क्या है? इससे संबंधित जानकारियों और शहर में हो रहे काम की रिपोर्ट आनलाइन जमा होती है। पहली तिमाही में 600, दूसरी में 600 और तीसरी में 1200 अंक यानी कुल 2400 अंक तय थे। रायपुर को इसमें 291 अंक कम मिले। इंदौर को इसमें 2313.38 अंक मिले हैं।

2. सर्टिफिकेशन में 1100 अंक, यही ज्यादा होते तो पोजीशन और ऊपर
इस कैटेगरी में रायपुर को 700 अंक कम मिले। इस कैटेगरी में भी दो श्रेणी थी। पहली गार्बेज फ्री सिटी-1100 अंक और दूसरी ओडीएफ-700 अंक। गार्बेज फ्री सिटी श्रेणी में स्टार रेटिंग दी जाती है। 1 स्टार को 200 अंक, 3 स्टार को 600 अंक, 5 स्टार को 900 और 7 स्टार को पूरे 1100 अंक। रायपुर को थ्री स्टार मिला यानी 600 अंक मिले, अर्थात 500 की कमी अा गई। दूसरी श्रेणी यानी ओडीएफ में ओडीएफ के लिए 100 अंक, ओडीएफ प्लस के लिए 200 अंक, ओडीएफ प्लस, प्लस के लिए 500 अंक और वाटर प्लस के लिए 700 अंक मिलते हैं। रायपुर को ओडीएफ डबल प्लस मिला यानी 500 अंक। इसमें भी 200 अंक कम रहे। जबकि बाकी शहरों को इस कैटेगरी में 1600 तक नंबर मिले हैं।

3. लोगों ने सवालों के जवाब नहीं दिए इसलिए 198 नंबर और कम
यह कैटेगरी पूरी तरह शहरवासियों के फीडबैक, स्वच्छता अभियान से उनके जुड़ाव से ताल्लुक रखती है। इसमें भी पांच श्रेणियां हैं जिनमें से फीडबैक में 600, एक्सपीरियेंस-300, इंगेजमेंट-450, स्वच्छता एप का उपयोग-350 अंक और इनोवेशन में 100 नंबर तय हैं। यह नंबर किस तरह से दिए गए, इसे इस तरह समझें कि अगर लोगों से पूछा गया कि क्या आपका शहर स्वच्छता सर्वेक्षण में शामिल है, और ज्यादा से ज्यादा लोगों ने हां में जवाब दिया तो 50 नंबर मिल जाएंगे? बाकी सब में इस तरह होगा, सभी मिलाकर 1800 अंकों में से रायपुर को 1602 अंक मिले अर्थात लोग और बेहतर तरीके से जवाब देते तो हमारे 198 नंबर नहीं कटते। हालांकि इस श्रेणी में हम नवी मुंबई और दिल्ली से आगे निकल गए।

सर्टिफिकेशन में बेहतर करने की पाॅलिसी पर काम
राजधानी ने सभी कैटेगरी में अच्छा प्रयास किया है। केवल सर्टिफिकेशन में कम नंबर मिले हैं, इस वजह से टोटल नंबर में हम पीछे रह गए। इसका विश्लेषण किया जाएगा कि आखिर सर्टिफिकेशन में ज्यादा नंबर हासिल करने में चूक कैसे हुए। उसे पाॅलिसी बनाकर सुधारेंगे क्योंकि अगली बार उम्मीद और अधिक की है।
-एजाज ढेबर,महापौर रायपुर

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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