बेड तकनीक अपनाते तो भिवानी में नहीं दरकता पहाड़: खदान नंबर-10 में 1000 फीट गहरी खुदाई बता रही पूरा खेल, हर दिन निकलता है ढाई करोड़ का पत्थर

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भिवानी3 घंटे पहलेलेखक: रमनदीप

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हरियाणा में भिवानी जिले के खानक-डाडम एरिया में हर दिन ढाई करोड़ रुपए का पत्थर खदान से निकलता है। यदि खदान में बेड तकनीक से खुदाई हुई होती तो यहां इतना बड़ा हादसा नहीं होता। लेकिन पिछली खदानों में 1000 फीट तक हुई अंधाधुंध खुदाई में कोई कार्रवाई न होने से खदान ठेकेदारों के हौसले बुलंद हुए और उन्होंने यहां भी नियमों की अनदेखी जारी रखी। डाडम पहाड़ी के आसपास नियमों की धज्जियां उड़ाकर खनन का खेल चल रहा था। पास ही स्थित पुरानी खदानों से इस पूरे खेल का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

खदान नंबर 32, जहां फिलहाल रेस्क्यू चल रहा है, के पास ही खदान नंबर 10 है। इसकी 1000 फुट तक गहरी खुदाई हुई है। ऊपर से देखने पर खदान की तलहटी में खड़े ट्रक भी दिखाई नहीं देते हैं। लगातार हो रहे अवैध खनन पर कार्रवाई नहीं होने के कारण की खनन माफिया की हिम्मत बढ़ी है। अब जिस खदान में हादसा हुआ है वहां भी जमीन की सतह से 400 फीट गहराई तक सीधी खुदाई कर दी गई है। समय रहते इस खेल पर नकेल कसी गई होती तो ये हादसा नहीं होता।

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झरने की तरह बह रहा भूमिगत पानी

खदान नंबर 10 में 1000 फीट तक खुदाई के बाद भूमिगत पानी निकल आया है। यह पानी झरने की तरह बह रहा है और नीचे सतह पर जमा हो रहा है। पानी को खदान से लगातार निकलाने का काम किया जा रहा है ताकि यहां पूरी खदान में पानी न भर जाए।

ये है खनन की बेड तकनीक

खनन वाली जगह पहाड़ की ऊंचाई 20 से 24 फीट तक ही होनी चाहिए। इससे ज्यादा हाइट होने पर पहले पहाड़ के सबसे ज्यादा ऊंचे हिस्से को काटकर समतल किया जाता है। इसे समतल करते समय सुरक्षा के लिहाज से सुनिश्चित किया जाता है कि पहाड़ का मलबा मजदूरों या कामगारों पर न गिरे। यदि पहाड़ से कोई पत्थर खिसके भी तो वह सिर्फ 20 फीट गिरकर पहले बेड पर ही अटक जाए ताकि नीचे काम करने वालों को खतरा कम हो।

इस तकनीक से तहें बनाकर खुदाई से यह सुनिश्चित किया जाता है कि मजदूरों और मशीनें सुरक्षित तरीके से काम करें और उनके ऊपर पत्थर ना गिरें। कोई बड़े लेवल पर स्लाइडिंग होती है तो भी बेड तकनीक से बनीं लेयर में फंसकर गिरने वाले पत्थरों की रफ्तार कम हो जाए। मौजूदा हादसे वाली जगह पर 60 डिग्री कोण देने की बजाय सीधा पहाड़ काट दिया और जड़ की ओर से ज्यादा काटा गया। इससे पहाड़ का बाकी हिस्सा कमजोर होकर सीधा मशीन और मजदूरों पर गिर गया।

माइनिंग सेक्शन 20 के तहत लगना चाहिए प्रतिबंध

माइनिंग सेफ्टी एक्ट की धारा-20 कहती है कि जहां खनन किया जाना है, वहां 23 फीट से ज्यादा खड़ी ऊंची चोटी नहीं होनी चाहिए। यदि इससे ज्यादा ऊंचाई है तो एरिया को माइनिंग सेफ्टी एक्ट की धारा-20 के तहत सील करके खनन कार्य रुकवाना होता है। डाडम में जहां हादसा हुआ है वहां तय नियम से 20 गुणा ज्यादा ऊंचे पहाड़े की सीधी दीवार खड़ी थी। इसकी तलहटी में खनन कार्य चल रहा था।

80 फीट तक ही होना था खनन, कर दिया सतह से 400 फीट नीचे तक

डाडम सरफेस माइनिंग प्लान के अनुसार खानक-डाडम में जमीन के पानी के लेवल मतलब 100 फीट तक खनन कार्य किया जाना था। इस खनन को भूमिगत लेवल से 20 फीट पहले बंद कर दिया जाना था। नियम के अनुसार, बात करें तो यहा सिर्फ 80 फीट तक ही खनन हो सकता था। वर्तमान में हादसे वाली जगह ही जमीन की सतह से 400 फीट गहरी है।

खानक-डाडम में रजिस्टर्ड हैं 189 क्रशर

खानक और डाडम गांव में 50 एकड़ में फैले खनन एरिया में 189 क्रशर रजिस्टर्ड हैं। इनसे बजरी, क्रशर रोड़ी की सप्लाई होती है। इन खदानों से हर दिन करीब 70 से 80 हजार टन पत्थर की क्रशरों को सप्लाई होती है। प्रतिदिन ढाई करोड़ रुपए का पत्थर खदान से निकलता है।

कम समय में ज्यादा और सस्ता काम करने के लिए हो रहा नियम विरुद्ध खनन

सुरक्षा नियम ताक पर रखकर खनन करने के पीछे सबसे बड़ी वजह कम समय में ज्यादा मात्रा में पत्थर तोड़ना और कम लागत में काम करना है । खनन के काम से जुड़े एक कॉन्ट्रेक्टर के अनुसार नियमों के अनुसार पहाड़ी को तोड़ने के लिए तैयार करने पर ही प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 1 करोड़ का खर्च आ जाता है। बेड बनाकर खनन करने पर पत्थर तोड़ना और ज्यादा महंगा होता है। इस कारण ही कुछ ठेकेदार पहाड़ी को सीधा काटते जाते हैं। ऐसा करने से बेड बनाने का खर्च भी बचता है और पहाड़ का हिस्सा भी ज्यादा टूटता जाता है। इस कारण थोड़े समय में ज्यादा खनन होने से उन्हें आसानी रहती है।

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चंडीगढ़ | दैनिक भास्कर

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