बेचाघाट आंदोलन: इसी नदी पर पुल बनने का ग्रामीण 35 दिनों से कर रहे हैं विरोध, प्रशासन : ऐसा कोई वर्कऑर्डर नहीं‎

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बड़गांव2 घंटे पहले

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बेचाघाट नदी पर प्रस्तावित पुल निर्माण और बीएसएफ कैंप के विरोध सहित सितरम में पर्यटन स्थल बनाने एवं कोयलीबेड़ा ब्लाक की 14 पंचायतें जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, उसे सामान्य नहीं किए जाने जैसी मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज पिछले 35 दिनों से धरना-प्रदर्शन कर रहा है। आंदोलनकारियों को अब बस्तर संभाग के आदिवासी नेताओं और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि शासन-प्रशासन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है और जब तक मांगें मानी नहीं जाएगी तब तक आंदोलन जारी रखने पर वे अड़े हैं।

सीधी बात‎; धनंजय नेताम,‎ एसडीएम, पखांजूर‎

धारा 144 लगी हुई है। आंदोलनकारी धरने पर हैं। समाधान क्यों नही हो रहा है?
– आंदोलनकारियों से चार दौर की वार्ता हो चुकी है और हम अब भी संपर्क में है। धारा-144 को लेकर आंदोलनकारियों को नोटिस जारी किया गया है।

फिर समाधान क्यों नहीं हो रहा है?
– स्पष्ट है कि शासन की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव ही नहीं है कि सितरम में पर्यटन केंद्र बनाया जा रहा हो। इसके साथ ही कोयलीबेड़ा ब्लाॅक की 14 पंचायतें आज भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं।

नदी पर पुल व बीएसएफ कैंप का विरोध क्यों?
– समाजजनों का कहना है कि उनसे सहमति नहीं ली गई है। बेचाघाट नदी पर पुलिया बनाने संबंधी कोई वर्कऑर्डर नहीं मिला है और ना ही बीएसएफ कैंप लगाने की कोई जानकारी स्थानीय प्रशासन के पास है।

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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