बिहार में खाली पेट बच्चों के वैक्सीनेशन का खेल देखिए: जिस बच्ची को राज्य में पहला टीका दिया गया; वह भी दोपहर एक बजे तक रही भूखी

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पटना23 मिनट पहले

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नाश्ते का पैकेट लेकर घूम रहीं यूनिसेफ की स्वास्थ्य कर्मी।

बिहार सरकार ने जिस बच्ची को वैक्सीनेशन का मॉडल बनाया उसे भूखे पेट वैक्सीन दी गई है। सुबह 7 बजे घर से खाली पेट निकली रितिका को मात्र बिस्किट खिलाकर टीका दे दिया गया। वह एक बजे तक इसी हाल में खाली पेट IGIMS में पड़ी रही। बिहार की वैक्सीनेशन मॉडल ही नहीं उसके साथ आए अन्य बच्चों का भी यही हाल रहा। वह भी सुबह घर से खाली पेट निकले और दोपहर एक बजे तक भूखा रखा गया।

बच्चों के हिस्से का नाश्ता खा रहे जिम्मेदारों को दैनिक भास्कर ने पकड़ा और जब सवाल किया तो यूनिसेफ की कर्मी किरण ने कहा कि यह सवाल स्वास्थ्य मंत्री से कीजिए कि बच्चों का नाश्ता कहां है। इतना ही नहीं वैक्सीनेशन के बाद बच्चों को एक ही गाड़ी में ठूसकर ले जाया गया।

बिहार की मॉडल रितिका जिसे खाली पेट दिया गया वैक्सीन।

बिहार की मॉडल रितिका जिसे खाली पेट दिया गया वैक्सीन।

बिहार की वैक्सीनेशन मॉडल की सुनिए क्या कहा
15 से 18 वर्ष तक के बच्चों के वैक्सीनेशन में रितिका बिहार की मॉडल बनी हैं। वह बिहार की पहली बेटी हैं जिन्हें कोरोना का पहला टीका दिया गया है। लेकिन वैक्सीनेशन के पीछे की कहानी कुछ और ही है। दैनिक भास्कर से बातचीत में रितिका ने बताया कि उसे 31 दिसंबर को ही बताया गया था कि पहला टीका उसे लेना है। सीएम उसे टीका लगवाकर बिहार में बच्चों के वैक्सीनेशन का शुभारंभ कराएंगे, वह उत्साहित थी और सोमवार को उसे सुबह ही घर से बुला लिया गया। वह घर से खाली पेट ही निकली थी। वह IGIMS पहुंची तो एक बजे तक ठोस आहार नहीं दिया गया। सुबह IGIMS में बिस्किट का एक पैकेट देकर वैक्सीनेशन करा दिया गया। दोपहर एक बजे तक न तो जूस दिया गया और न ही नाश्ता का पैकेट। दोपहर में एक और बिस्किट का पैकेट दिया गया जो वह हाथ में लेकर घूम रही थी।

NCC कैडेट्स ने बताया नहीं दी गई थी वैक्सीनेशन की जानकारी।

NCC कैडेट्स ने बताया नहीं दी गई थी वैक्सीनेशन की जानकारी।

NCC कैडेट ने कहा- पहले नहीं बताया गया कि लगेगा टीका
NCC के कैडेट्स को भी न तो नाश्ते का पैकेट दिया गया और न ही जूस दिया गया। कैडेट्स का कहना है कि सोमवार को सुबह मैसेज दिया कि IGIMS पहुंचना है। कोरोना का टीका लेना है इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। वह सुबह 8 बजे ही घर से निकल गए और जल्दबाजी में कुछ खा भी नहीं पाए। बच्चों का कहना है कि जब वह IGIMS पहुंचे तो पता बताया गया कि उन्हें टीका दिया जाएगा। इसके बाद वह अपने घर वालों को फोन लगाए और टीका की अनुमति लेने के बाद वैक्सीनेशन कराए। बच्चों का कहना है कि उन्हें एक बिस्किट और पानी की बोतल दी गई। इसके बाद वैक्सीन लगा दिया गया। दोपहर एक बजे तक वह बिना खाए भूखे पेट रहे। एनसीसी कैडेट्स का कहना है कि उन्हें भूख लगी है लेकिन क्या करें, कितना बिस्किट खाएं। पहले पता होता तो घर से नाश्ता करके निकलते।

IGIMS से वैक्सीनेशन के बाद गाड़ी में ठूसकर NCC कैडेट्स को ले जाते घर।

IGIMS से वैक्सीनेशन के बाद गाड़ी में ठूसकर NCC कैडेट्स को ले जाते घर।

वैक्सीन लगाने के बाद बच्चों को गाड़ी में ठूसकर ले जाया गया
वैक्सीनेशन के बाद बच्चों को गाड़ी में ठूसकर ले जाया गया है। एक गाड़ी में 12 बच्चों को भरकर उन्हें वापस ले जाया गया। दैनिक भास्कर ने जब सवाल किया तो बच्चों ने कहा कि अभी वैक्सीन लिया है और अब मजबूरी है इस कारण से गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं। अब घर जाने के बाद सोशल डिस्टेंस का पालन करेंगे। राज्य स्वास्थ्य समिति की जिम्मेदारी थी कि बच्चों को वैक्सीनेशन के लिए IGIMS लाना था और उन्हें घर पहुंचाना था। लेकिन, गाड़ियों में किस तरह से ठूसकर ले जाया गया यह साफ देखा जा सकता है।

जिम्मेदार खा गए नाश्ता
इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में बच्चों के वैक्सीनेशन के दौरान उन्हें नाश्ता देने की व्यवस्था थी। नमकीन के पैकेट के साथ बिस्किट और अन्य खाद्य सामग्री मंगाई गई थी। लेकिन, बच्चों को नमकीन नहीं दिया गया। बाहर यूनिसेफ के कर्मचारी हाथ में नमकीन के कई पैकेट लेकर खड़े और खाते दिखाई पड़े। इस पर जब सवाल किया गया तो चौंकाने वाला जवाब मिला।

दैनिक भास्कर ने जब यूनिसेफ की महिला कर्मी किरण से बात की तो बताया कि नाश्ता दिया गया है। सवाल पर वह बौखला गई और कहीं वह किसी से डरती नहीं हैं, नाश्ता क्यों नहीं मिला जाकर मंत्री से सवाल कीजिए। बच्चों का नाश्ता कौन खा गया इसका सवाल स्वास्थ्य मंत्री से करने की बात कहकर किरण धमकाते हुए आगे बढ़ गईं।

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बिहार | दैनिक भास्कर

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