Wednesday, December 8, 2021
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फिर चर्चा में हरी आंखों वाली अफगान लड़की: 36 साल बाद शरबत गुल वर्ल्ड मीडिया में फिर छाईं, अब इटली की नागरिक बनेंगी

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रोम34 मिनट पहले

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1985 की इस तस्वीर ने दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं। फोटोग्राफर स्टीव मैककैरी ने इस लड़की को अफगानिस्तान की मोनालिसा कहा था।

1985 में नेशनल जियोग्राफिक मैगजीन के कवर पर एक फोटोग्राफ पब्लिश हुआ। इसमें एक हरी आंखों वाली बदहवास से लड़की थी। इसका नाम था शरबत गुल। शरबत अफगानिस्तान की रहने वाली है। 12 साल की उम्र में वो पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर रिफ्यूजी थी।

शरबत की उम्र अब करीब 48 है। एक बार फिर वो चर्चा में हैं। इसकी वजह इटली सरकार का एक बयान है। इटली ने कहा है- अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां से जिन लोगों को निकालकर इटली लाया गया है, उनमें शरबत भी शामिल है। गुल इटली कब और कैसे पहुंचीं, इसका खुलासा नहीं किया गया है।

1980 में अमेरिकी फोटोग्राफर स्टीव मैककरी ने गुल की तस्वीर खींची थी। इस तस्वीर को जून 1985 में नेशनल ज्योग्राफिक मैगजीन का कवर बनाया गया था। तस्वीर को दुनियाभर में सराहा गया और गुल अफगानिस्तान की सबसे प्रसिद्ध रिफ्यूजी बन गई।

1980 में अमेरिकी फोटोग्राफर स्टीव मैककरी ने गुल की तस्वीर खींची थी। इस तस्वीर को जून 1985 में नेशनल ज्योग्राफिक मैगजीन का कवर बनाया गया था। तस्वीर को दुनियाभर में सराहा गया और गुल अफगानिस्तान की सबसे प्रसिद्ध रिफ्यूजी बन गई।

इटली ने कहा- अफगानिस्तान में देश छोड़ने वाले लोगों की मदद करने वाले NGO ने गुल को वहां से बाहर निकालने की मांग की थी। अफगान नागरिकों को निकालने के लिए इटली ने निकासी प्रोग्राम चलाया था, जिसके तहत सरकार ने गुल को वहां से निकालकर रोम पहुंचाया।

शरबत की यह तस्वीर 2017 की है। यह भी नेशनल जियोग्राफिक मैगजीन ने ही पब्लिश की थी। इस वक्त वो इटली में हैं।

शरबत की यह तस्वीर 2017 की है। यह भी नेशनल जियोग्राफिक मैगजीन ने ही पब्लिश की थी। इस वक्त वो इटली में हैं।

अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार ने शरबत को घर, खेती की जमीन और आर्थिक सहायता दी। शरबत के चार बच्चे हैं।

अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार ने शरबत को घर, खेती की जमीन और आर्थिक सहायता दी। शरबत के चार बच्चे हैं।

फोटोग्राफर स्टीव मैककरी ने एक इंटरव्यू में शरबत गुला को ‘अफगानिस्तान की मोनालिसा’ कहा था। पाकिस्तान ने शरबत को जाली आईडेंटिटी रखने के आरोप में 2 हफ्ते तक हिरासत में रखा था। बाद में छोड़ना पड़ा।

फोटोग्राफर स्टीव मैककरी ने एक इंटरव्यू में शरबत गुला को ‘अफगानिस्तान की मोनालिसा’ कहा था। पाकिस्तान ने शरबत को जाली आईडेंटिटी रखने के आरोप में 2 हफ्ते तक हिरासत में रखा था। बाद में छोड़ना पड़ा।

फर्जी दस्तावेजों के आरोप में पाकिस्तान ने निकाला का
गुल ने एक इंटरव्यू में कहा था- 1979 में सोवियत हमले के चार -पांच साल बाद मैं पहली बार पाकिस्तान पहुंची थी। मैं उन लाखों अफगानों में से एक थी, जिन्होंने बॉर्डर पर शरण ली थी। 2016 में मुझे फर्जी दस्तावेजों के साथ पाकिस्तान में रहने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और वापस अफगानिस्तान भेज दिया गया। दो हफ्ते हिरासत में रही थी।

इटली ने इस महीने की शुरुआत में अफगानिस्तान की पहली महिला मुख्य चीफ प्रॉसिक्यूटर मारिया बशीर को नागरिकता दी थी। मारिया 9 सितंबर को इटली पहुंची थीं। इटली ने सितंबर की शुरुआत में करीब 5 हजार अफगानों को अफगानिस्तान से बाहर निकाला था। अफगानिस्तान में अमेरिका के नेतृत्व वाले अफगानी नागरिकों को बाहर निकालने के अभियान में 5 देश शामिल थे। इस अभियान में जर्मनी, ब्रिटेन और तुर्की के साथ इटली ने भी हिस्सा लिया था।

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विदेश | दैनिक भास्कर

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