तीसरी लहर से निपटने की तैयारी: स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी सरकारी व निजी अस्पतालों के कर्मचारियों को दी जा रही ट्रेनिंंग, ताकि आपात स्थिति में व्यवस्था संभाल सकें

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फरीदाबाद43 मिनट पहले

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ईएसआई मेडिकल कॉलेज बना नोडल सेंटर,लगातार डाॅक्टरों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के संक्रमित होेने को लेकर केंद्र सरकार के निर्देश पर उठाया गया कदम

  • स्वास्थ्य कर्मियों को ओमिक्रॉन के लक्षण वाले मरीजों की पहचान करने, जरूरत पड़ने पर उन्हें ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित हो सके

तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी है। अभी तीसरी लहर का पीक आना है। इसके पहले बड़ी संख्या में डॉक्टर, स्टाफ नर्स आैर अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ संक्रमित हो रहे हैं। इस आपात स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर शहर के सभी सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों मेें कार्यरत कर्मचारियों, खासकर टेक्निकल स्टाॅफ को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।

एनआइटी स्थित ईएसआई मेडिकल कॉलेज को नोडल सेंटर बनाया गया है। जिसमें पब्लिक हेल्थ विभाग से जुड़े लोगों को देशभर के विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से वर्चुवल मोड पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि आपात स्थिति पैदा होने पर सेकेंड व थर्ड लाइन के पैरा मेडिकल स्टाफ से व्यवस्था संभाली जाए। ये प्रशिक्षण दो दिन का है। इस ट्रेनिंग की रिपोर्ट प्रतिदिन नेशनल मेडिकल कमीशन को भेजी जा रही है।

इसलिए देना पड़ रहा प्रशिक्षण

ईएसआई मेडिकल काॅलेज के डिप्टी डीन डॉ. एके पांडेय ने बताया कि फरीदाबाद, दिल्ली एनसीआर समेत देशभर से जो रिपोर्ट आ रही है, उसके तहत बड़ी संख्या में डॉक्टर, नर्स व अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ तीसरी लहर की चपेट में आकर संक्रमित हो रहे हैं। चंूकि जनवरी लास्ट बीक से 15 फरवरी तक तीसरी के पीक पर होने की संभावना है। ऐसे में यदि ऐसे हालात पैदा होते हैं कि अधिकांश डाॅक्टर व नर्स संक्रमित हो गए तो सेेकेंड व थर्ड लाइन के लिए पब्लिक हेल्थ् से जुड़े टेक्निकल स्टाफ के जरिए व्यवस्था संभाली जा सके।

ईएसआई मेडिकल कॉलेज के डिप्टी डीन डॉ. एके पांडेय

ईएसआई मेडिकल कॉलेज के डिप्टी डीन डॉ. एके पांडेय

इन बातों का दिया जा रहा प्रशिक्षण

डिप्टी डीन ने बताया कि दो दिवसीय चलने वाले इस प्रशिक्षण में स्वास्थ्यकर्मियों व टेक्निकल कर्मचारियों को ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करने, मरीज की गंभीरता का आंकलन करने, गंभीर मरीजों की जरूरतों का पता लगाने, ऑक्सीजन प्लांट चलाने, किस मरीज को कब आक्सीजन अथवा वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ेगी, दी जाने वाली दवाओं समेत करीब दर्जनों लक्षणों की पहचान करने आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हांेने बताया कि इस प्रशिक्षण में जूिनयर डॉक्टरों, स्टाफ नर्स, प्रशिक्षण लेने वाली एएनएम, इंटर्नर डॉक्टर व अन्य टेक्निकल कर्मचारियों को शामिल किया जा रहा है।

एनएमसी को करनी पड़ रही रिपोर्ट

डॉ. पांडेय ने बताया कि सरकारी अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी, डिस्पेंशरी के कर्मचारियों के अलावा निजी अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर अपने अपने कर्मचारियेां को इस प्रशिक्षण में अनिवार्य रूप से शामिल होने को कहा है। साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कर्मचारियों की डिटेल रोजाना नेशनल मेडिकल कमीशन को भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह का प्रशिक्षण देकर आपात स्थिति के लिए सेकेंड और थर्ड लाइन तैयार हो सकेगी। इससे काफी मदद मिलेगी। प्रशिक्षण देश भर के विभिन्न विधाओं के रोग विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।

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दिल्ली + एनसीआर | दैनिक भास्कर

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