Wednesday, December 8, 2021
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तालिबान का फरमान: अफगान टीवी चैनल वो प्रोग्राम न दिखाएं, जिनमें महिला कलाकार हों- वुमन जर्नलिस्ट का हिजाब पहनना भी जरूरी

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काबुल30 मिनट पहले

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अफगानिस्तान की तालिबान हुकूमत ने देश के तमाम टीवी चैनल्स को आदेश दिया है कि वो ऐसे प्रोग्राम बिल्कुल टेलिकास्ट न करें, जिनमें महिला कलाकार हों। रविवार को जारी आदेश में कई और आदेश भी दिए गए हैं। न्यूज चैनल्स से कहा गया है कि वो भी यह तय करें कि उनकी हर महिला जर्नलिस्ट अपनी रिपोर्ट्स टेलिकास्ट करते वक्त पारंपरिक हिजाब पहने हो।

कुछ दिन पहले अफगानिस्तान के सूचना एवं प्रसारण विभाग ने कहा था कि देश में चलने वाले तमाम टीवी चैनल्स को उनकी गाइडलाइन्स का पालन करना होगा। तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के साथ ही पूरे मुल्क पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद से कई बंदिशें लागू की गई हैं।

अब नई गाइडलाइन्स
रविवार को तालिबान हुकूमत ने नई गाइडलाइन्स जारी कीं। इन्हें रिलीजियस गाइडलाइन कहा गया है। देश में मौजूद तमाम टीवी चैनल्स से कहा गया है कि वे सख्ती से इनका पालन करें। सबसे सख्त शर्त यह है कि अब सिर्फ वो ही ड्रामा या प्रोग्राम टेलिकास्ट किए जा सकेंगे जिनमें महिला एक्टर्स न हों।

न्यूज चैनल्स से कहा गया है कि वो उन एंकर्स या जर्नलिस्ट्स की रिपोर्ट्स टेलिकास्ट न करें जिनमें वे हिजाब न पहने हों। ऐसी फिल्में या प्रोग्राम प्रसारित नहीं किए जा सकेंगे जिनमें इस्लाम से संबंधित चित्र दिखाए गए हों।

तालिबान ने सत्ता में आने के बाद वादा किया था कि वो महिला पत्रकारों को काम की आजादी देगा, लेकिन बाद में कवरेज के दौरान उनसे बदसलूकी की जाने लगी। (फाइल)

तालिबान ने सत्ता में आने के बाद वादा किया था कि वो महिला पत्रकारों को काम की आजादी देगा, लेकिन बाद में कवरेज के दौरान उनसे बदसलूकी की जाने लगी। (फाइल)

परंपराओं का ध्यान रखें
गाइडलाइन्स में कहा गया है- ऐसे प्रोग्राम या फिल्म नहीं दिखाई जा सकतीं जो इस्लाम या अफगानिस्तान की परंपराओं के खिलाफ हों। तालिबान प्रवक्ता हाकिफ मोहाजिर ने कहा- हम साफ कर देना चाहते हैं कि ये नियम नहीं, बल्कि गाइडलाइन्स हैं। पूरी उम्मीद है कि देश में मौजूद टीवी चैनल्स इनका पालन करेंगे। तालिबान ने नई गाइडलाइन्स को सोशल मीडिया पर भी जारी किया ताकि आम लोग भी इन्हें समझ सकें।

महिलाओं को अधिकार नहीं
तालिबान ने सत्ता संभालने के बाद वादा किया था कि इस बार महिलाओं को इस्लाम की हद में रहकर तमाम अधिकार दिए जाएंगे। हालांकि, अब तक ऐसा हो नहीं रहा है। यूनवर्सिटी और स्कूलों में महिलाओं के लिए नियम बेहद सख्त हैं। महिला जर्नलिस्ट्स को सड़क पर पीटा गया।

अफगानिस्तान में दो दशक से प्राईवेट मीडिया चैनल्स हैं। तालिबान के सत्ता में आने के बाद इन पर कही पाबंदियां लगाई गई हैं। इसके बाद से कई चैनल्स तो बंद हो गए हैं। तालिबान ने 1996 से 2001 तक पहली बार अफगानिस्तान पर हुकूमत की थी। तब मीडिया न के बराबर था। फिल्मों और यहां तक कि म्यूजिक पर भी रोक लगा दी गई थी।

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विदेश | दैनिक भास्कर

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