जानलेवा पतंगबाजी: पतंग की डोर काटते-काटते चाइनीज मांझा राहगीरों के लिए जानलेवा बन रहा, भटार में माझे से बाइक सवार घायल

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सूरतएक घंटा पहले

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मांझे की चपेट में आने के बाद बाइक से गिरकर घायल हुआ युवक।

मकर संक्रांति नजदीक आते ही शहर में पतंग उड़ने शुरू हो जाते हैं। पतंगबाजी का शौक जानलेवा बनता जा रहा है। पतंग की डोर काटते-काटते चाइनीज मांझा अब ‘जिंदगी की डोर’ भी काटने लगा है। जानलेवा होने के बावजूद शहर में चाइनीज मांझा खुलेआम बिक रहा है। मकर संक्रांति से एक सप्ताह पहले ही शहर में एक युवक मांझे से घायल हो गया। इस साल की यह पहली घटना है।

जानकारी के अनुसार भटार में स्थित अमरदीप अपार्टमेंट में रहने वाले 38 वर्षीय कपिल अमृतभाई पटेल गुरुवार शाम को बाइक से जा रहे थे, तभी 6:40 बजे भटार रोड पर स्थित ऑलिव सर्किल के पास मांझे की चपेट में आ गए। माझे से उनकी आंख और नाक का ऊपरी हिस्सा कट गया। कपिलभाई लहूलुहान होकर सड़क पर गिर गए। उन्हें गंभीर हालत में सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। एक घंटे चले माइनर ऑपरेशन के दौरान 12 टांके लगाए गए। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर ने बताया कि मांझा थोड़ा सा और नीचे लगा होता तो दोनों आंखे भी जा सकती थी।

किस्तम अच्छी थी कि नाक और आंख के ऊपरी हिस्से को काटते हुए माझा निकल गया। मरीज का सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने कहा कि मकर संक्रांति के दौरान बाइक चलाते समय लोगों को ध्यान देना चाहिए। जरा सी चूक से जान भी जा सकती है। मांझे से गला और गर्दन भी कट सकता है। इस हालत में घायलों का बचना मुश्किल हो जाता है। ऑन ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर डॉ. उमेश चौधरी ने बताया कि नाक और आंख के ऊपरी हिस्से में चोट लगी है। घाव इतना अधिक था कि मांस बाहर निकल आया था। मरीज को अभी अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।

पिछले साल 2 बच्चों समेत 4 की मौत हुई थी
पतंगोत्सव से पहले मांझे से घायल होने की इस साल की यह पहली घटना है। वर्ष 2021 में 2 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 10 लोग मांझे से घायल हो गए थे। वहीं, पतंग उड़ाते समय 28 लोग छत से नीचे गिर गए थे। पतंग और मांझे से खुद काे बचाने के चक्कर में 64 लोग सड़क हादसे के शिकार हुए थे।

15 दिन पहले ही शुरू हो जाती है पतंगबाजी
शहर में 15 दिन पहले ही पतंगबाजी शुरू हो जाती है, पर कोरोना की वजह से इस साल कोई रौनक नहीं है। पहले रोजाना दो से तीन लोगों के मांझे से घायल होने की घटनाएं आती थीं। पतंगोत्सव से पहले 50 से 60 लोग मांझे से घायल हो जाते थे, इसमें से कितनों की जान भी चली जाती थी। पतंगोत्सव के बाद भी लोग माझे से घायल होते थे।

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गुजरात | दैनिक भास्कर

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