Monday, November 29, 2021
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जांबाज सैनिकों ने हिलाया दुश्मन का दिल: वॉर एक्सरसाइज में तोप के गोलों की आवाज व धूल उड़ाते दौड़ते टैंक के बीच दिख रहा जवानों का जोश

जैसलमेर6 मिनट पहले

पाकिस्तान से सटे राजस्थान की रेतीले धोरों में भारतीय सेना का बड़ा युद्धाभ्यास दक्षिण शक्ति शुक्रवार को पूरा हो जाएगा। एशिया की सबसे बड़ी फील्ड फायरिंग रेंज पोकरण में हो रहे इस युद्धाभ्यास में भारतीय सेना के 30 हजार से भी अधिक जवान दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों को भेदने वाले सटीक निशाने साध रहे हैं। गुरुवार को लक्ष्यों को भेदने की अपनी क्षमता को परख जवानों ने खुद को साबित किया। इसका समापन शुक्रवार को थल सेनाध्यक्ष मनोज एम नरवणे की मौजूदगी में होगा।

टारगेट पर सटीक निशाना है एक मात्र लक्ष्य

पाक बॉर्डर के नजदीक चल रहे सेना के युद्धाभ्यास को लेकर पाकिस्तान में भी हलचल है। इसी हलचल से भारतीय वायुसेना और थल सेना के जवानों का जोश हाई है। तोप के गोले, युद्ध टैंक और बुलेट के साथ सेना के जवान लक्ष्य को भेद पाने में पूरी तरह कामयाब हो रहे हैं। पोकरण फायरिंग रेंज पूरी तरह से युद्ध स्थल नजर आ रहा है। तोप व गोलियों की आवाज, धूल उड़ाते दौड़ते टैंक और जवानों के जोश की आवाज दुश्मन के दिल की धड़कनें बढ़ाने के लिए काफी दिखती हैं।

भारतीय सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवाने की मौजूदगी में गुजरात में कच्छ के रण से लेकर राजस्थान के मरुस्थल तक चल रहे सैन्य अभ्यास में सेना ने अपनी पारंपरिक और मॉडर्न तकनीकी का बेहतरीन ढंग से धरातल पर प्रदर्शन किया है। पहली बार युद्धाभ्यास मानवरहित भी किया जा रहा है।

हर निशान अचूक

इस दौरान जवानों का हर निशाना अचूक है। कोई बेकार नहीं जा रहा। हर बुलेट, हर तोप के गोले का अपना टारगेट है। सटीक लक्ष्य भेदा जा रहा है। किस तरह सैनिक हथियारों को लेकर दुश्मन की ओर आगे बढ़ रहे हैं, ताकि फतह का झंडा फहराया जा सके। कम संसाधनों और दुर्गम रेतीले धोरों को चीरते हुए अपने दम पर अपने लक्ष्य को साधने की कोशिश का एक बेहतरीन नज़ारा यहां दिख रहा है। दुश्मन के काल्पनिक ठिकाने बनाए गए हैं और तय लक्ष्य और रणनीति के साथ हिन्दुस्तानी सैनिक असली युद्द की तरफ अपने लक्ष्य को अंजाम देते बढ़ते चले जा रहे हैं। एयर स्पेस, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को आजमाया जा रहा है। इस युद्धाभ्यास में देश में ही विकसित हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर के अलावा ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है।

युद्धाभ्यास क्यों

  • परमाणु हमले की सूरत में कम से कम बाधित होने और पीछे हटे बिना जरूरत के मुताबिक अपने ओपरेशन को जारी रखने की युद्ध कौशल को सीखना।
  • दुश्मन सेना की पैदल और बख्तरबंद इकाईयों की हर चाल को नाकाम करते हुवे एक दुसरे के हथियारों, उपकरणों , नेतृत्व और नियंत्रण प्रणाली और ओपरेशन के दौरान रणनीति और उसके सामने अपनी खुद की ताकत को समझा-परखा गया।
  • संयुक्त योजना के तहत विभिन्न लक्ष्य का घेराव और खोज और बचाव , संयुक्त अभ्यास और एक दूसरे के हथियारों की खासियत और मारक क्षमता को समझने की कोशिश।
  • थार के रेगिस्तान में दुश्मन या आतंकी हमले को विफल करने की दिशा में होता है ये अहम अभ्यास।
  • आधुनिक हथियार काम में लेने के दौरान आतंकी हमले के दौरान सटीक नेतृत्व और रियल टाइम इन्फॉर्मेशन पर केन्द्रित है यह अभ्यास
  • ड्रोन और लडाकू विमानों , हेलिकोप्टर के साथ आधुनिक संचार उपकरणों को काम में लेते हुवे आतंकी या दुश्मन देश के सैनिकों को मार गिराने का ओपरेशन

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राजस्थान | दैनिक भास्कर

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