चीन में लॉकडाउन के नाम पर तानाशाही: प्रेग्नेंट महिलाओं ने बच्चे गंवाए तो लोग भूख से मर रहे, पेशेंट्स ने हॉस्पिटल के दरवाजे पर दम तोड़ा

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वॉशिंगटन12 मिनट पहले

ये चीन है। एक कोरोना संक्रमित मिला तो पूरे शहर में सख्त लॉकडाउन लगा दिया। ये भी नहीं सोचा कि जो लोग घरों में बंद हो गए हैं, उनका क्या होगा। अस्पतालों में संक्रमितों के अलावा किसी को कोई इलाज नहीं मिल रहा। किसी को हार्ट अटैक आया तो वो अस्पताल आया, लेकिन इलाज नहीं मिला और वहीं दम तोड़ दिया। प्रेग्नेंट महिला डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंची, तो उसको भी रिसीव नहीं किया। उसके बच्चे ने कोख में ही दम तोड़ दिया। वहीं, सख्ती के चलते कुछ लोग तो भूख से मर रहे हैं।

कोरोना केस बढ़ने पर चीन के शियान में दिसंबर के आखिरी हफ्ते से लॉकडाउन जारी है।

जानलेवा जीरो कोविड पॉलिसी
शियान शहर में तो लॉकडाउन जानलेवा साबित हो रहा है। यहां एक शख्स सीने में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा। वो दर्द से कराहता रहा, लेकिन हॉस्पिटल के स्टाफ ने उसे एडमिट करने से इनकार कर दिया। वह अस्पताल के दरवाजे पर दर्द से तड़पता रहा और स्टाफ देखता रहा। कुछ देर में उसकी मौत हो गई। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि वो उस इलाके का रहने वाला था, जिसे कोविड की मीडियम रिस्क कैटेगरी में रखा गया था।

एक महिला को 8 महीने का गर्भ था। लेबर पेन हुआ तो अस्पताल पहुंची। डॉक्टर्स ने उसे बताया कि उसकी कोविड टेस्ट रिपोर्ट वैलिड यानी मान्य नहीं है। उसी वक्त महिला को ब्लीडिंग शुरू हो गई। महिला की जान तो जैसे-तैसे बच गई, लेकिन बच्चे ने कोख में ही दम तोड़ दिया। ऐसी अनगिनत कहानियां हैं।

शियान के अलावा कई और शहरों में एक संक्रमित मिलने पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं।

शियान के अलावा कई और शहरों में एक संक्रमित मिलने पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं।

भूखे को रोटी की जगह लाठी
लॉकडाउन में एक युवक के पास पेट भरने को कुछ नहीं था। भूख ने उसे पाबंदियों की जंजीरें तोड़ने पर मजबूर कर दिया। वो सड़क पर पहुंचा और वहां मौजूद पुलिस से खाने के लिए कुछ मांगा। बदले में दो पुलिसवालों ने उसे मार-मारकर अधमरा कर दिया। दिसंबर के आखिरी हफ्ते से यही हालात हैं। शियान में 1 करोड़ 30 लाख लोग घरों में बंद हैं। ज्यादातर के पास पेट भरने के लिए कुछ नहीं है। बच्चों को दूध और बुजुर्गों को दवा तक मुहैया नहीं।

जिनपिंग की जिद और प्रोपेगंडा
राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार जीरो कोविड इन्फेक्शन की पॉलिसी पर चल रही है। इसके लिए जितनी सख्ती की जा सकती है, उतनी तमाम बेशर्मी से की जा रही है। कोविड रोकना जरूरी है, लोग भले ही भूख और दूसरी परेशानियों से मर जाएं। सख्ती के लिए हजारों कर्मचारी और सुरक्षाबल कंट्रोल रूम से लेकर सड़कों तक तैनात हैं। सवाल करने का हक तो चीन में पहले भी नहीं था, अब तो इसकी रत्तीभर भी गुंजाइश नहीं। वुहान से तो कुछ कहानियां भी सामने आईं थीं, शियान से कुछ सामने नहीं आता। एक सरकारी प्रोपेगंडा चलाया जा रहा है- सब ठीक है, कोरोना काबू में है।

लॉकडाउन की वजह से घरों में बंद लोगों के सामने भूख से मरने का खतरा पैदा हो गया है।

लॉकडाउन की वजह से घरों में बंद लोगों के सामने भूख से मरने का खतरा पैदा हो गया है।

ये तानाशाही नहीं तो और क्या है
जिस बच्ची के पिता की अस्पताल के दरवाजे पर हार्टअटैक से मौत हुई, उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर दर्द बयां करना चाहा। सरकार ने अकाउंट ही ब्लॉक कर दिया। अब लोग कोविड के अलावा दूसरी बीमारियों से ज्यादा मर रहे हैं। वे आवाज उठाने की कोशिश करते हैं, लेकिन शी जिनपिंग सरकार इन्हें बेरहमी से दबा देती है। वुहान में तो कोविड से अनगिनत मौतें हुईं थीं, शियान में तो सिर्फ तीन लोगों ने दम तोड़ा है। यहां 95% एडल्ट्स फुली वैक्सीनेटेड हैं। इसके बावजूद लोगों पर रहम नहीं किया जा रहा। लोग घुट-घुटकर मरने पर मजबूर हैं। 45 हजार लोगों को क्वारैंटाइन किया गया है।

चीन की सरकार ने पहले कुछ स्टोर्स खोले थे, लेकिन अब इन्हें भी बंद कर दिया गया है।

चीन की सरकार ने पहले कुछ स्टोर्स खोले थे, लेकिन अब इन्हें भी बंद कर दिया गया है।

कर्मचारी भी मजबूर
शियान में हेल्थ कोड सिस्टम बनाया गया, ताकि पॉजिटिव लोगों को ट्रैक किया जा सके। इस सिस्टम पर इतना दबाव आया कि इसने काम करना ही बंद कर दिया। कुछ लोगों ने अफसरों को बताया कि उनके पास खाने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सामान नहीं है, लेकिन अफसर भी मजबूर हैं। कुछ ने तो बाकायदा सोशल मीडिया पर कहा- हम अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। तकलीफ के लिए माफी चाहते हैं। रोटी की तलाश में बाहर निकले लोगों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल में ठूंस दिया गया। इंटरनेट पर बेहद सख्त निगरानी की जा रही है, ताकि सरकार की इमेज खराब न हो। सरकार मैसेज दे रही है- ऑल इज वैल….

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विदेश | दैनिक भास्कर

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