Monday, November 29, 2021
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चिटफंड कंपनी के एक लाख 21 हजार आवेदन: CM की फटकार के बाद हरकत में आया प्रशासन; पुलिस को सौंपे गए 10 हजार केस

बिलासपुर37 मिनट पहले

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चिटफंड कंपनियों ने कई निवेशकों से पैसे वसूले हैं। (फाइल)

बिलासपुर में चिटफंड कंपनियों के खिलाफ जिला प्रशासन को एक लाख 21 हजार आवेदन पत्र मिले हैं, जो कई महीनों से कलेक्टोरेट व SDM दफ्तर में धूल खा रहे हैं। CM की नाराजगी जाहिर करने के बाद प्रशासन एक बार फिर से हरकत में आ गया है और अब आवेदनपत्रों की लिस्टिंग कर उसे पुलिस को सौंपने की तैयारी चल रही है। चिटफंड कंपनियों के जालसाजी के शिकार निवेशकों व एजेंटों को राज्य सरकार ने उनकी रकम लौटाने का भरोसा दिलाया था। लेकिन, प्रशासन की लेटलतीफी के चलते अभी तक मामला अधर में है। हालांकि अब 10 हजार केस को पुलिस को सौंप दिया गया है, जिस पर कार्रवाई करने कहा गया है।

चिटफंड प्रकरणों के निपटारे में हो रहे विलंब को लेकर बीते दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन व पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। इससे पहले राज्य शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने जिले के शहर व ग्रामीण क्षेत्र में चिटफंड कंपनियों के जालसाजी के शिकार निवेशकों से आवेदनपत्र जमा कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए उन्हें दस्तावेजों के साथ आवेदनपत्र जमा करने के लिए समय दिया गया था। इस दौरान जिले भर से एक लाख 21 हजार निवेशकों के साथ ही एजेंटों ने तहसील व कलेक्टोरेट में आवेदनपत्र जमा किए थे। इस प्रक्रिया के बाद निवेशकों के आवेदनपत्र स्टोर रूम में धूल खा रहे हैं। आलम यह है कि अभी तक आवेदनपत्रों की छटनी तक नहीं की जा सकी है। यही वजह है कि समीक्षा बैठक में आला अधिकारयों को मुख्यमंत्री बघेल की फटकार सुननी पड़ी। उनकी सख्ती के बाद अब जिला प्रशासन फिर से सक्रिय हो गया है और निवेशकों के आवेदनपत्रों को तहसीलवार लिस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चिटफंड कंपनियों की भी लिस्ट बनाने कहा गया है।

पुलिस को मिले 10 हजार आवेदनपत्र
पुलिस अधीक्षक दीपक झा ने बताया कि जिला प्रशासन कार्यालय में चिटफंड कंपनी के संबंध में एक लाख से अधिक निवेशकों ने आवेदनपत्र जमा किए हैं। इनमें से करीब 10 हजार आवेदनपत्र जिला प्रशासन ने कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंपा है। पुलिस इन आवेदनपत्रों की जांच कर चिटफंड कंपनियों के हिसाब से सूची बना रही है। ताकि, चिटफंड कंपनी की जानकारी जुटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

22 आपराधिक प्रकरण दर्ज है
चिटफंड कंपनियों के जालसाजी के शिकार निवेशकों ने साल 2011 के बाद थानों में शिकायत दर्ज कराई थी। जिस पर पुलिस ने जिले में 22 प्रकरण दर्ज किए हैं। इन मामलों में कंपनी के डायरेक्टर्स समेत 72 आरोपी हैं। इनमें 12 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। जबकि, 12 आरोपी बिहार, ओड़ीसा, मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित अन्य राज्यों के जेलों में बंद हैं। इसके अलावा भी चिटफंड कंपनियों से जुड़े आरोपी फरार हैं। पुलिस ने चिटफंड कंपनियों के संचालकों की संपत्ति की जानकारी भी हासिल की है। फिर भी अब तक उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई नहीं की जा सकी है। इसके चलते एक भी निवेशकों की राशि भी नहीं लौटाई जा सकी है।

पुलिस की बनी स्पेशल टीम, आरोपियों की होगी तलाश
SP दीपक झा ने बताया कि चिटफंड कंपनियों के फरार डायरेक्टर्स की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके अलावा जिला प्रशासन से मिले 10 हजार आवेदनपत्रों की भी जांच की जाएगी। आवेदनों के आधार पर अलग-अलग टीमों का गठन कर दिया है। टीम चिटफंड कंपनी व उनकी संपत्ति व उनके अधिकारी-कर्मचारियों की जानकारी जुटाकर शीघ्र कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही प्रकरण से जुड़े जो आरोपी अलग-अलग राज्यों के जेलों में बंद है। उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आने के निर्देश दिए गए हैं।
निवेशक बोले-सीधे थाने में कराते आवेदन
चिटफंड कंपनियों के खिलाफ मिली शिकायतों को लेकर अब एक तरह से जिला प्रशासन ने पल्ला झाड़ लिया है। निवेशकों का कहना है कि उन्हें रकम लौटाने का भरोसा दिलाकर आवेदनपत्र जमा कराया गया था। अब उनके आवेदन पर कार्रवाई के लिए पुलिस को मामला सौंपा जा रहा है। निवेशकों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि पूर्व में दर्ज आपराधिक प्रकरणों में पुलिस निवेशकों को राशि लौटाने कोई सफल प्रयास नहीं कर पाई है। ऐसे में अब इतनी बड़ी संख्या में निवेशकों की राशि लौटाने के लिए क्या कार्रवाई करेगी। उनका यह भी कहना है कि जब जिला प्रशासन को पल्ला झाड़ना था तो आवेदनपत्र क्यों लिया गया। निवेशकों के आवेदनपत्रों को सीधे संबंधित थानों में जमा कराना था। इससे शासन-प्रशासन को परेशान नहीं होना पड़ता।

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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