Wednesday, December 8, 2021
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खास बातचीत: रानी मुखर्जी बोलीं- बंटी और बबली-2 में कंटिन्यूटी तो रखना था, इसलिए लड्डू वगैरह नहीं खाया

मुंबई16 मिनट पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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डेढ़ दशक बाद एक बार फिर बंटी और बबली का फ्रेंचाइजी फिल्म बंटी और बबली-2 रिलीज हुई है। इस फ्रेंचाइजी में रानी मुखर्जी, सैफ अली खान, शरवरी, सिद्धांत चतुर्वेदी, पंकज त्रिपाठी, यशपाल शर्मा आदि कलाकार हैं। आदित्य चोपड़ा निर्मित और वरुण वी. शर्मा निर्देशित यह फिल्म 19 नवंबर को थिएटर में रिलीज हो गई है। इसके प्रमोशन के दौरान रानी मुखर्जी से यशराज स्टूडियो में मुलाकात हुई, तब वे एक कुर्सी पर बैठी और दूसरी कुर्सी पर पांव रखे नजर आईं। इंटरव्यू के बाद चलते-चलते उन्होंने बताया कि डांस के दौरान पांव में चोट लग गई है। खैर, यहां पढ़िए, रानी मुखर्जी से दैनिक भास्कर खास बातचीत:

शूटिंग में कई महीनों का अंतर रहा, फिर कंटिन्यूटी कैसे बरकरार रखी?
वक्त कितना भी लगे, पर कंटिन्यूटी तो रखना ही था। इसलिए लड्डू वगैरह कुछ भी नहीं खाए, क्योंकि इसके लिए वेट मेंटेन रखना था।

बंटी और बबली 2 में अपने ठगी के काम को दोबारा शुरू करती हैं। क्या निजी जीवन में कोई ऐसा काम है, जिसे दोबारा करना चाहेंगी?
निजी जीवन में ऐसा कुछ काम तो नहीं है, जिसे मैं वापस शुरू करना चाहूंगी। मैं एक्टिंग तो कर ही रही हूं। पढ़ाई के दौरान ही फिल्मों में आ गई। 16 साल की उम्र से फिल्में कर रही हूं। हां, कोविड के दौरान मैंने अपने हाथों से बहुत सारे व्यंजन बनाए। बहुत कुछ सीखा भी और बहुत सारी चीजें बनाईं, यह सब करके मजा आया।

ट्रेलर में बच्चा आपको क्यूट कहता है, तब खुश हो जाती हैं। निजी जीवन में प्रशंसा को किस रूप में लेती हैं?
बड़े अच्छे से। तारीफ तो होनी ही चाहिए न! मतलब कोई तारीफ करेगा, तब खुशी तो होती ही है। फिर तो बच्चा तारीफ करे, हम उम्र वाले करें, हमारे बड़े करें या फिर फैंस करें, तारीफ अच्छी ही लगती है।

बबली कैरेक्टर के लिए किस तरह की तैयारी करनी पड़ी?
मुझे अपने आपको ऐसे दिखाना था, बिल्कुल मिडिल क्लास महिला। कोशिश यही रही कि बंटी और बबली-2 में भी वैसे ही दिखाई दूं। इसके लिए मच्छी और चावल भी खाया। यह मत समझना कि चावल खाने से शरीर फूल जाता है। हां, इसके लिए वर्कआउट करना पड़ता है। खैर, लैंग्वेज आदि को लेकर कैरेक्टर पर ऐसी मेहनत की है कि फिल्म देखकर बड़ा मजा आएगा। यह पिक्चर बूढ़े से लेकर बच्चे तक, हर आयु वर्ग के लोगों को पसंद आएगी।

आपकी जर्नी को ढाई दशक हो गए। फिल्मों और कहानियों में क्या तब्दीली महसूस करती हैं?
आई थिंक, अब लोग ज्यादातर कमर्शियल फिल्मों में भी जो किरदार निभाते हैं, उसमें रियलिज्म, एक ओनेस्ट्री और दिल को छू जाने वाली एक बात हो। इसे कमर्शियल दायरे में रखकर दिखा सकें, तब लोगों को बहुत अच्छी लगती है। जैसे सैफ फिल्म में अपनी तोंद रखते हैं। उनमें ऐसी कोई बात नहीं है कि मैं हीरो हूं तो तोंद नहीं रख सकता। आजकल किरदार के लिए लोग अलग-अलग चीजें ट्राई कर रहे हैं।

वह दर्शकों को पसंद भी आ रही है, क्योंकि एक कनेक्शन व रिलेट करती है। दर्शकों को देखकर लगता है कि यह तो मैं हूं, यह तो मेरे पड़ोस की चाची जैसी हैं या फिर यह तो मेरे दोस्त की तरह है। ये हम तुम के टाइम में भी था। अगर मेरी फिल्मोग्राफी देखेंगे तो मैंने ऐसे रोल किए हैं, जो सबके लिए रिलेटबल हो। मैंने तो हर फिल्म में इतना रिलेटबल रखा है कि लोगों को मेरे ग्लैमरस लुक और नॉर्मल लुक्स में भी रिलेटबल लगा है। इसे बरकरार रखते आई हूं।

रियल लाइफ का फलसफा किस तरह से बदला हुआ पाती हैं?
आई थिंक, इस पैंडनेमिक में जो सबसे बड़ी चीज यह हुई है, वह यह है कि पहली बार सारे लोग बड़े प्यार से पॉजिटिव तरीके से एकजुट हुए हैं। जैसे कि मैं अपने एक्सप्रीरियंस से बता सकती हूं कि मेरी बच्ची नर्सरी में थी, जब पैंडनेमिक शुरू हुआ और अब वह केजी 2 में है। पूरे पैंडनेमिक में वह बड़ी हो गई। बच्चों के दो-तीन साल जो नर्सरी से लेकर फर्स्ट स्टैंडर्ड आने से पहले के होते हैं, वह बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण टाइम होता है। क्योंकि पहली बार अपने मां-बाप को छोड़कर स्कूल जाते हैं। टीचर्स से मिलते हैं, दोस्त बनाते हैं।

अब उनके तीन साल बेकार हो गए, क्योंकि घर में बैठकर उनको सब कुछ सीखना पड़ा। लेकिन मैंने देखा कि उन्होंने कैसे होम स्कूल को फटाफट अडॉप्ट किया। इसमें एक कम्यूनिटी फीलिंग आई कि कैसे एक-दूसरे को मदद करना चाहते हैं। पहली बार अपने बारे में न सोचकर दूसरों के बारे में सोच रहे हैं। जैसे कि हमारे टीचर्स अपने बच्चों के बारे में न सोचकर हमारे बच्चों को ऑन लाइन पढ़ा रहे हैं।

ऐसी बहुत कुछ चीजें हुई हैं। एक फिलॉसफी होती है कि हमने अपने टाइम में वॉर नहीं देखी, जैसे बहुत लोगों ने 1947 का फ्रीडम वॉर देखा है। वर्ल्ड वॉर 2 देखा है। यह हमारे टाइम में वॉर की तरह ही सिचुएशन रही है। इस कोविड-19 में जिस तरह की सिचुएशन हुई है, उसमें पृथ्वी के सारे लोग एकजुट होकर कितनी सारी चीजें एक साथ किए हैं। उनमें कॉन्सर्ट्स हुए हैं, कितने सारे आर्टिस्ट एक साथ मिलकर आए, माइग्रेन्ट्स के लिए बहुत कुछ किया गया। इस तरह बहुत सारी पॉजिटिव चीजें हुई हैं।

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