कामयाब कूटनीति: मलेशिया से पॉम ऑयल और तुर्की से ड्रोन खरीद रहा भारत, UN में ये कश्मीर मुद्दे पर PAK का साथ देते थे

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नई दिल्ली8 मिनट पहले

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डिप्लोमैसी के एक्सपर्ट अकसर कहा करते हैं कि हर देश अपने हित देखता है। UN जनरल असेंबली में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले तुर्की और मलेशिया भी अब अपने हित देख रहे हैं। भारत ने अपनी डिप्लोमैसी के जरिए इन दोनों पर नकेल कस दी है। मलेशिया को पॉम ऑयल इम्पोर्ट पर घेरा गया था। अब इकोनॉमी के बेहद खराब दौर से गुजर रहे तुर्की से भारत करीब 100 ड्रोन खरीद रहा है। पाकिस्तानी मीडिया कह रहा है कि भारत डॉलर्स के दम पर उसके दोस्तों को खरीद रहा है, उन्हें चुप करा रहा है।

मुद्दा समझने के लिए थोड़ा पीछे चलें
UN में कश्मीर मुद्दे पर सिर्फ दो ही देश पाकिस्तान का साथ देते थे या कहें देते हैं। मलेशिया और तुर्की। तुर्की तो सऊदी अरब का एकछत्र राज खत्म करके इस्लामी देशों की बादशाहत हासिल करना चाहता है। मलेशिया में दो साल पहले तक महातिर मोहम्मद प्रधानमंत्री थे। वे भी इमरान खान और तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैयप एर्दोआन के बहकावे में आकर कश्मीर का मुद्दा उठाते थे। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में तो बयानों से इनका मुकाबला किया, लेकिन इसके साथ ही एग्रेसिव डिप्लोमैटिक एप्रोच दिखाई।

इमरान खान ने यह ट्वीट 2019 में किया था। वो तुर्की और मलेशिया को साथ लेकर एक इंग्लिश टीवी चैनल शुरू करना चाहते थे। इसका मकसद इस्लामोफोबिया को दूर करना था। ये चैनल अब तक शुरू नहीं हो पाया। पाकिस्तान और तुर्की दोनों FATF की ग्रे लिस्ट में हैं।

इमरान खान ने यह ट्वीट 2019 में किया था। वो तुर्की और मलेशिया को साथ लेकर एक इंग्लिश टीवी चैनल शुरू करना चाहते थे। इसका मकसद इस्लामोफोबिया को दूर करना था। ये चैनल अब तक शुरू नहीं हो पाया। पाकिस्तान और तुर्की दोनों FATF की ग्रे लिस्ट में हैं।

मलेशिया को कैसे संभाला
2019 की शुरुआत में मलेशिया के तब के PM महातिर मोहम्मद ने जब कश्मीर पर बयानबाजी की तो भारत ने UN में तो जवाब दिया ही, साथ ही इकोनॉमिक डिप्लोमैसी का इस्तेमाल किया। 90 लाख टन के साथ मलेशिया का सबसे बड़ा पॉम ऑयल इम्पोर्टर भारत ही था। भारत ने इंडोनेशिया से इम्पोर्ट बढ़ाने और मलेशिया को किनारे करने की रणनीति अपनाई। दबाव में आए मलेशिया के सुर बदल गए। चंद दिन बाद इकोनॉमी के ही मुद्दे पर महातिर मोहम्मद की कुर्सी भी चली गई। नए प्रधानमंत्री ने भारत से रिश्ते बेहतर कर लिए। भारत ने मलेशिया से पॉम ऑयल इम्पोर्ट में ज्यादा कमी नहीं की।

मलेशिया सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कुल 17.24 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। इसमें भारत ने 6.43 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट्स किए। मलेशिया से 10.81 अरब डॉलर के इम्पोर्ट्स किए गए।

भारत के भगोड़े जाकिर नाइक के साथ महातिर मोहम्मद। दो साल पहले उन्होंने यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठाया था।

भारत के भगोड़े जाकिर नाइक के साथ महातिर मोहम्मद। दो साल पहले उन्होंने यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठाया था।

तुर्की से डील
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन पाकिस्तान और मलेशिया को साथ लेकर OIC के बराबरी का संगठन बनाना चाहते थे। 2019 में इमरान-महातिर और एर्दोआन की मीटिंग में मुस्लिम देशों का एक BBC जैसा चैनल बनाने पर भी सहमति हुई थी। बहरहाल, एर्दोआन कश्मीर पर एक्टिव हुए तो हमारे विदेश मंत्री जयशंकर ने साइप्रस का दौरा किया। तुर्की और साइप्रस का विवाद है। एर्दोआन को लगा कि भारत साइप्रस का साथ देकर उसे घेर सकता है। अब तुर्की की इकोनॉमी बेहद खस्ताहाल है। वो पाकिस्तान के साथ FATF की ग्रे लिस्ट में भी है। भारत 100 मल्टीरोटर ड्रोन खरीदकर तुर्की की काफी मदद कर सकता है।

तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में मौजूद इंडियन एम्बेसी के मुताबिक, 2018-19 में दोनों देशों के बीच 7.84 अरब डॉलर ट्रेड था। 2019-20 में यह आंकड़ा 7.086 अरब डॉलर हो गया। 2020-21 में आपसी कारोबार कुछ कम हुआ और यह आंकड़ा 5.42 अरब डॉलर हो गया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ एर्दोआन। तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन देने में आनाकानी की थी। अब भारत तुर्की से ड्रोन खरीद रहा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ एर्दोआन। तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन देने में आनाकानी की थी। अब भारत तुर्की से ड्रोन खरीद रहा है।

हम जिहादी बनाएंगे और भारत ड्रोन्स
पाकिस्तान का मीडिया भारत और तुर्की की ड्रोन डील को लेकर बेहद परेशान है। कई न्यूज चैनल्स पर एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि इमरान सरकार सोती रही और भारत उसका दोस्त ले उड़ा। पाकिस्तानी जर्नलिस्ट आलिया शाह ने कहा- इमरान खान ने तुर्की से जिहादी ड्रामा एर्तोगुल खरीदा, फिर इसे नेशनल टीवी पर चलवाया। इसके स्टार्स को इस्लामाबाद बुलाकर हीरोज की तरह पेश किया गया। दूसरी तरफ, भारत ने क्या किया? बुरे वक्त में तुर्की से 100 ड्रोन खरीदने की डील की। भारत की कंपनी DCM श्रीराम इंडस्ट्रीज ने तुर्की की इस ड्रोन कंपनी जाइरोन डायनेमिक्स के 30% शेयर 35 लाख डॉलर में खरीद लिए। भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी होगा। मतलब ये कि हम एर्तोगुल से जिहादी बनाएंगे और भारत ड्रोन्स बनाएगा। जाइरोन के ड्रोन 1.2 किलोमीटर की ऊंचाई पर 80 मिनट तक उड़ान भर सकता है और भारतीय कंपनी ये वक्त काफी हद तक बढ़ाने जा रही है।

भारत तुर्की की कंपनी जाइरोन डायनेमिक्स से 100 ड्रोन खरीदने जा रहा है। इस कंपनी के 30% शेयर भारतीय कंपनी के पास हैं।

भारत तुर्की की कंपनी जाइरोन डायनेमिक्स से 100 ड्रोन खरीदने जा रहा है। इस कंपनी के 30% शेयर भारतीय कंपनी के पास हैं।

एर्दोआन बेहद शातिर खिलाड़ी
पाकिस्तान के ही एक और जर्नलिस्ट कमर चीमा ने कहा- एर्दोआन बेहद शातिर खिलाड़ी हैं। वो कहते कुछ और हैं और करते कुछ और। दो मिसालें हमारे सामने हैं। पहली- फिलिस्तीन के मामले में उन्होंने इजराइल के खिलाफ खूब बयानबाजी की। जिहादी नारे लगाए, लेकिन इसके साथ ही इजराइल और तुर्की के बीच लाखों डॉलर का ट्रेड भी होता रहा। दूसरी- कश्मीर मुद्दे पर UN में एर्दोआन भारत के खिलाफ बोले। जब भारत ने साइप्रस का साथ देकर तुर्की को घेरना शुरू किया तो वो चुप हो गए। अब भारत तुर्की की बदहाल इकोनॉमी को ड्रोन डील के जरिए सहारा दे रहा है। एर्दोआन भी कश्मीर मुद्दा भूल जाएंगे। मोदी सरकार ने प्राईवेट कंपनी को आगे रखकर डिप्लोमैटिक विक्ट्री हासिल की है।

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विदेश | दैनिक भास्कर

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