ऑनलाइन गेम से साइबर फ्रॉड: अगले लेवल के चक्कर में फंसे बच्चे, गेम के लिए वह मोबाइल न दें जो बैंक खाता लिंक हो

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इंदौरएक घंटा पहलेलेखक: हेमंत नागले

उज्जैन के पंवासा निवासी वृद्ध राज्य साइबर सेल पहुंचे। बताया खाते से कई बार में 80 हजार रुपए उड़ गए। पुलिस ने सवाल किया किसी को ओटीपी, पासवर्ड बताया था। वृद्ध ने मना कर दिया। घर के सदस्यों को मोबाइल लेकर पुलिस लाइन बुलवाया। पोते के मोबाइल में प्ले स्टोर चेक किया तो पता चला कि उसने एक्स्ट्रा कॉइन के ऑफर में टॉपअप लिए, जिससे दादा का खाता खाली हुआ। पोता पढ़ाई कर रहा है और उसकी उम्र 17 साल है। हकीकत पता चलने के बाद बिना कार्रवाई के लौट गए।

इसी तरह उज्जैन के ही पीएचई कार्यालय के कर्मचारी के खाते से भी 25 हजार रुपए निकल गए। उन्हें लगा ठगी हुई है। राज्य साइबर सेल को शिकायत की। पुलिस ने पीएचई कर्मचारी को उनके नाबालिग बेटे के साथ बुलवाया। उसके पास पढ़ाई के लिए जो मोबाइल था उसमें प्ले स्टोर से कई गेम डाउनलोड थे। डिटेल निकाली तो गेम खेलने पर खरीदे टॉपअप के खर्च की डिटेल सामने आ गई। पिता ने बेटे को वहीं पीटा और कार्रवाई किए बिना घर चले गए।

अब सवाल ये उठता है कि आखिर बच्चे ऑनलाइन गेमिंग के दौरान पेरेंट्स के बैंक अकाउंट को कैसे एक्सेस कर लेते हैं? ऐसे कौन-कौन से गेम हैं जो अपग्रेड होने या दूसरी सर्विस के लिए हजारों रुपए मांगते हैं? क्या ऐसे मामलों में स्मार्टफोन पर फोन बैंकिंग सुरक्षित नहीं है? सभी सवालों के जवाब जानते हैं साइबर DSP सृष्टि भार्गव से…

ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए शासन ने एक टोल फ्री नंबर-155260 बनाया है। ऑनलाइन फ्रॉड होने की स्थिति में इस नंबर पर कॉल कर जानकारी दें। साइबर आपको मामले में जल्द से जल्द समाधान करता है। ऑनलाइन जितने टॉपअप रिचार्ज वाले गेम हैं बच्चे उनमें लेवल पार करने की होड़ में यह कर रहे हैं। बच्चों को इनसे दूर रखना जरूरी है। अभिभावक बच्चों को वह मोबाइल न दें, जिसमें बैंक खाता लिंक हो।

साइबर एक्सपर्ट की सलाह
1. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पेमेंट करते हैं तब वो हमारे डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड की डिटेल सेव कर लेता है। इन सॉफ्टवेयर में ऑनलाइन की-लॉगर्स होते हैं। ऐसे में ये डेटा वहां पर फीड हो जाता है। इससे डेटा की सिक्योरिटी भी कम हो जाती है। इससे गेमिंग ऐप ही नहीं बल्कि दूसरे ऐप्स से भी अकाउंट से पैसे निकलने का खतरा हो जाता है। कई ऐप्स में ट्रोजन या दूसरे मेलवेयर भी होते हैं। ये फोन में इन्स्टॉल होकर आपके डेटा को चुराते हैं।

2. यदि यूजर ने कभी भी गूगल प्ले स्टोर से कोई कोई ऐप खरीदा है, तब पेमेंट किए गए क्रेडिट या डेबिट कार्ड का डेटा उसमें सेव हो जाता है। ऐसे में जब भी हम अगली बार कोई ऐप गूगल प्ले स्टोर से खरीदते हैं तो वो ऑटोमैटिक आपके कार्ड पेमेंट मोड पर आ जाता है। ऐसे में बच्चे को आपके कार्ड का CVV पता है तो वे आसानी से ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। आपने दूसरा पेमेंट प्लेटफॉर्म जोड़ा है और बच्चे उसका पिन जानते हैं, तब वहां से भी ट्रांजैक्शन हो सकता है।

बच्चों को पेमेंट करने से कैसे रोका जाए?
1. एक्सपर्ट्स ने इस बात की सलाह दी है कि बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग से दूर रखा जाए, क्योंकि बच्चों से ट्रांजक्शन के ज्यादातर मामले गेम्स के दौरान ही होते हैं। ज्यादा बेहतर है कि बच्चों को ऑफलाइन गेम्स खेलने दिए जाएं या फिर फोन का इंटरनेट डेटा बंद रखा जाए या पासर्वड प्रोटेक्टेड किया जाए।

2. पेरेंट्स को अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय कर देनी चाहिए। खासकर इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन के लिए लिमिट को 500 से 1000 रुपए तक कर देना चाहिए। ताकि बच्चे गलती से भी बड़ा अमाउंट किसी इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर खर्च नहीं कर पाएं। आपको जब भी जरूरत हो लिमिट अपने हिसाब से बढ़ा लें।

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