ऐसे कैसे लड़ेंगे तीसरी लहर से?: राज्य के 46 ऑक्सीजन प्लांट का मेंटेनेंस हो रहा पर पीएम केयर फंड के 49 के लिए बजट नहीं

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भिलाई4 घंटे पहलेलेखक: अनुराग शर्मा

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पीएम केयर फंड से लगे प्लांट का हाल।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद प्रदेश में 112 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए हैं। इन ऑक्सीजन प्लांट को चलाने और इसके मेंटेनेंस को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। पीएम केयर फंड से पूरे प्रदेश में 49 मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं, लेकिन राज्य शासन से उनके मेंटेनेंस के लिए अभी तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है। जबकि हर प्लांट का मेंटेनेंस हर एक हजार घंटे के उपयोग के बाद जरूरी है।

इतना ही नहीं राज्य शासन की एजेंसी सीजीएमसी ने 46 प्लांट लगाए गए हैं, उनके मेंटेनेंस में कोई परेशानी नहीं है। दुर्ग में मदर चाइल्ड केयर यूनिट और बिलासपुर के जिला अस्पताल में लगे प्लांट बिना मेंटेनेंस के संचालित भी हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स मुताबिक मेंटेनेंस के अभाव में प्लांट के कंप्रेशर खराब हो सकते हैं।

पीएम केयर फंड से अलग-अलग कंपनियां जैसे बीईएमएल, एचआईटीसी और सीएमएस ने सरकारी अस्पतालों में प्लांट लगाए हैं। इसमें से एक कंपनी बीईएमएल एक प्लांट के मेंटेनेंस के लिए 94000 रुपए मांग रहा है। जबकि इन्हीं अस्पतालों में सीजीएमएससी से 46 ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। इन प्लांटों का रेगुलर मेंटेनेंस हो रहा है।

हवा से ऑक्सीजन बनाने वाले प्लांट में दो कमियां भी?
1. हवा से ऑक्सीजन बनाने वाले प्लांट की एक सबसे बड़ी कमी यह कि इसमें स्टोरेज के इंतजाम नहीं है। इससे आपूर्ति के लिए प्लांट को ऑन करना पड़ता है।
2. हवा से ऑक्सीजन बनाने वाले प्लांट को चलाने बिजली की आवश्यकता होती है। जब प्लांट ऑन होता है तो ही आपूर्ति होती है। इसीलिए जनरेटर भी इंस्टॉल कराया गया है।

प्लांट का निर्धारित समय पर मेंटेनेंस इसलिए जरूरी
1.सभी उपकरण काम करते रहें

पहले कंप्रेशर, वायुमंडल से हवा खींचता है। ड्रायर से हवा की नमी खत्म की जाती है। हवा में 21% ऑक्सीजन, 70% नाइट्रोजन शेष 9% में अन्य गैस बचती है। पीएसए-1 और पीएसए-2 टैंक से गुजरती हैं। जिओ लाइट अन्य गैस को खींच शुद्ध ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए टैंक में भेजता है।

2.कोई बड़ी खराबी नहीं आए
960 लीटर प्रति क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट की कीमत 90 लाख रुपए बताई जा रही है। इस अनुसार उसके प्रमुख पांचों उपकरण महंगे होते हैं। कंप्रेशर की कीमत 10 लाख, फिल्टर की 3 लाख जीओ लाइट 700 से 2000 रुपए किग्रा है। ये बड़े उपकरण खराब न हो, इसके लिए मेंटेनेंस जरूरी है।

ऐसे समझें: इन प्लांट‌्स को रोज चलाने के लिए यह जरूरी
इस बात को जिला अस्पताल दुर्ग में लगे प्लांट से समझें। मदर चाइल्ड यूनिट में लगे प्लांट को रेगुलर चलाया है। क्योंकि पिछले तीन माह से संचालित 25 बेड के एसएनसीयू व तीन ओटी में इसी प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही है, जबसे यह प्लांट चल रहा है, बार-बार सिलेंडर बदलने की समस्या खत्म हो गई है। यदि मेंटेनेंस नहीं हुआ तो कंप्रेसर खराब हा़े सकते हैं। सप्लाई भी बाधित हो सकती है।

मेंटेनेंस के लिए 94000 मांगे
हमारे यहां ऑक्सीजन प्लांट एक पीएम केयर फंड से और दूसरा सीजीएमएससी ने लगाया है। पीएम केयर फंड का प्लांट बीईएमएल ने लगाया, वह मेंटेनेंस से लिए 94000 रु. मांग रहे हैं। जबकि सीजीएमएससी रेगुलर मेंटेनेंस कर रहे हैं।-डॉ. पी बालकिशोर, सिविल सर्जन, दुर्ग

राज्य सरकार को मेंटेनेंस करना है
पीएम केयर फंड से दिए गए प्लांट अलग-अलग एजेंसियां लगा रही हैं। हमारे एग्रीमेंट में राज्य सरकार को ही प्लांट का मेंटेनेंस करना है। अगर बजट नहीं है, तो उन्हें वरिष्ठअधिकारियों से मांग करनी चाहिए। -डॉ. अयाज तंबोली, नोडल, पीएम केयर फंड छत्तीसगढ़

सीधी बात –

इंतजाम नहीं किए हैं तो विभाग की गलती – टीएस सिंहदेव (स्वास्थ्य मंत्री )

सीजीएमएससी से लगे ऑक्सीजन प्लांट का मेंटेनेंस रेगुलर कराया जा रहा, पीएम केयर फंड से लगे प्लांट की देखभाल के लिए बजट नहीं, ऐसा क्यों?
प्लांट कहीं का हो, अगर हमारे यहां लगा हैं तो उसका मेंटेनेंस हमारी जिम्मेदारी है। अगर विभाग ने इंतजाम नहीं किए हैं, तो यह विभाग की गलती है।

पीएम केयर के प्लांट के मेंटिनेंस के लिए दुर्ग में सीएस से 94000 मांगा जा रहा है। उनका कहना की बजट नहीं है। जबकि यहीं सीजीएमससी के प्लांट का मेंटेनेंस हो रहा है।
मैं इसे चेक करवाता हूं। ऐसा नहीं होना चाहिए। प्लांट का मेंटेनेंस जरूरी है। तीसरी लहर के हिसाब से भी हर प्लांट का दुरुस्त कराना है।

प्रदेश में पीएम केयर से 49 प्लांट और सीजीएमएससी से 46 ऑक्सीजन प्लांट है। सीजीएमएससी के 3 साल तक मेंटेनेंस के इंतजाम हैं। पीएम केयर के नहीं।
मुझे इसकी पूरी जानकारी नहीं है। मै इसे चेक करवाता हूं। शीघ्र से शीघ्र जिस-जिस प्लांट का मेंटेनेंस जरूरी है, उसे कराया जाएगा, जहां बजट की जरूरत होगी, बजट दे देंगे।

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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