एटा…500 करोड़ का कारोबार बर्बादी की कगार पर: सरकारी नीतियों का जलेसर घुंघरू घंटी उद्योग पर पड़ रहा प्रभाव, कारोबार को है संरक्षण का अभाव

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एटा8 मिनट पहले

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कभी भारत वर्ष के कोने कोने में बॉलीवुड सहित, अमेरिका कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इंग्लैंड सहित पूरी दुनिया में धूम मचाने वाले एटा जिले के घुंघरुओं की खनक अब लगभग गायब हो चुकी है। सरकारी नीतियों और संरक्षण के आभाव में एटा का जलेसर घुंघरू घंटी उद्योग बर्बादी की कगार पर खड़ा है। कारोबारियों को समय पर बैंक से ऋण नहीं मिल पाने से घुंघरू बनाने वाली भट्टियां न के बराबर बची हैं। बता दें की यहां साल भर में लगभग 500 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ करता था।

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत किया गया है चयन

कारोबारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत एटा जनपद में जलेसर की घुंघरू घंटी उद्योग का चयन तो किया है। परंतु कोई सुविधाएं नहीं दे रही। इस उद्योग को लगाने के लिए बैंकों में फाइलें पड़ी धूल फांक रहीं हैं। बैंक उनको ऋण नहीं दे रहा।

यहां के प्रतिष्ठित घुंघरू घंटी के कारोबारी कृष्ण गोपाल गुप्ता ने बताया कि यहां के कुशल कारीगरों को काम नहीं मिल रहा। कोरोना काल में कामकाज लगभग ठप्प होने के कारण तो जैसे इस उद्योग की कमर ही टूट गई है। आज ये उद्योग घाटे का सौदा साबित हो रहा है। अब कोरोना की तीसरी लहर में भी इस उद्योग पर मार पड़नी शुरू हो गई है।

डूबते उद्योग को संरक्षण की आवश्यकता

सरकार इस डूबते हुए उद्योग के संरक्षण के लिए आवश्यक सुविधाएं और सहूलियत नहीं दे रही। उन्होंने बताया कि यहां की मिट्टी घुंघरू, घंटियों के सांचे बनाने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। लेकिन अब सरकारी नीतियों के कारण यह उद्योग पनप नहीं पा रहा।

कारोबारी कृष्ण गोपाल दास ने बताया कि यहां बिजली की अनियमित आपूर्ति, बैंकिंग सुविधाओं का अभाव, व्यापार के लिए ऋण मिलने में परेशानी और सड़कों की खस्ता हाल की वजह से पर्यटकों के न पहुंच पाने के कारण, घुंघरू, घंटी उद्योग दम तोड़ रहा है। अब यहां घुंघरू बनाने वाली भट्टियां न के बराबर बची हैं। यदि समय रहते सरकार ने इस घुंघरू घंटी उद्योग के संवर्धन के लिए आवश्यक सुविधाएं मुहैया नहीं कराई तो घुंघरुओं की खनक अतीत की बात हो जाएगी।

सरकारी नितियों से भी गिर रहा कारोबार

एटा के जलेसर में घुंघरू घंटी उद्योग के पुराने निर्माता आशीष गुप्ता बताते हैं कि ताज महल की वजह से आगरा विश्व में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। आगरा आने वाले पर्यटक घुंघरू घंटी की तलाश में एटा जनपद की जलेसर घुंघरू घंटी नगरी में आना चाहते हैं। लेकिन यहां पर न अच्छे होटल हैं, न कोई टूरिस्ट बंगला। आगरा से जलेसर आने जाने का रास्ता भी सही नहीं है और सुरक्षा के भी कोई उपाय नहीं हैं। इसलिए घुंघरू नगरी में पर्यटक खरीदारी के लिए नहीं आ पाते। वे बताते हैं कि सरकार की नीतियां भी घुंघरू घंटी उद्योग के लिए लाभदायक नहीं हैं।

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उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर

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