Monday, November 29, 2021
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ईयू की अपनी सेना होगी: यूराेपीय संघ की बैठक में पेश सैन्य समीकरण का मसौदा हुआ लीक; इस कवायद में सकारात्मक नहीं डेनमार्क,नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रिया व स्वीडन का रुख

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  • The Draft Of The Military Equation Presented At The Meeting Of The European Union Leaked; The Attitude Of Denmark, Netherlands, Austria And Sweden Is Not Positive In This Exercise

ब्रसल्स2 घंटे पहले

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ईयू का मानना है कि बदलते वैश्विक समीकरण और रूस की बढ़ती दखलंदाजी के कारण अब सैन्य रूप से आत्मनिर्भरता का समय है।

बेलारूस और पोलैंड के बीच सीमा विवाद के चलते यूरोप में नए सैन्य समीकरण पनप रहे हैं। यूरोपीय संघ (ईयू) के सदस्य देशों के बीच पिछले सप्ताह हुई बैठक में संयुक्त सेना का प्रस्ताव पेश हुआ। लीक हुए इस प्रस्ताव के अनुसार ईयू के देशों ने अपनी सेना की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए संयुक्त सेना की कवायद की जा रही है। ईयू का मानना है कि बदलते वैश्विक समीकरण और रूस की बढ़ती दखलंदाजी के कारण अब सैन्य रूप से आत्मनिर्भरता का समय है। अफगानिस्तान में भी ईयू देशों के नागरिकों को निकालने के दौरान भी ऐसी ही परेशानियां सामने आईं थीं।

इसके लिए ईयू के देशों को बजट में भी इजाफा करना होगा। लेकिन ईयू के सदस्य देश डेनमार्क, नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रिया और स्वीडन संयुक्त सेना के प्रति उत्साहित नहीं हैं। पहले भी ईयू द्वारा कोरोना से मुकाबले के लिए बनाए गए फंड में इन्होंने सहयोग नहीं दिया था।

रूस के यूरोप में बढ़ते दखल से ईयू बना रहा नया समीकरण

  • 27 सदस्य देश की बैठक में रखा गया ईयू की संयुक्त सेना का प्रस्ताव
  • 60 हजार सैनिकों की संयुक्त सेना का प्रस्ताव, कुछ समय में अंतिम मंजूरी संभव
  • 05 हजार सैनिक पहले चरण में बेलारूस से लगती पोलैंड की सीमा पर लगाए जाएंगे

क्यों: नाटो नहीं, अब सुरक्षा में आत्मनिर्भरता

बेलारूस और पोलैंड सीमा विवाद के चलते ईयू के देश पोलैंड को सुरक्षा के लिए नाटो देशों व अमेरिका पर निर्भर होना पड़ रहा है। इन्होंने पोलैंड को अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई है। अब ईयू के देशों का मानना है कि आने वाले समय में यदि किसी अन्य देश को जरूरत पड़ी तो संयुक्त सेना काम आएगी।

कैसे: गुप्त सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सकेगा

प्रस्ताव के अनुसार ईयू के सभी 27 देशों के सैनिकों को संयुक्त सेना में शामिल नहीं किया जाएगा। कुछ ही देशों के सैनिकों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। आधिकारिक रूप से ईयू की संयुक्त सेना के लिए सभी देशों की ओर से मंजूरी प्रदान करनी होगी। इसके बाद ही ईयू की संयुक्त सेना का गठन हो पाएगा।

कब: अगले साल मार्च में मंजूरी मिलने की संभावना

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों यूरोपीय संघ की संयुक्त सेना के सबसे बड़े समर्थक हैं। अगले साल मार्च में उन्हें ही ईयू की अध्यक्षता करना है। मैक्रों का स्पष्ट मानना है कि इससे ईयू के देशों की नाटो पर निर्भरता कम होगी। पोलैंड, एस्टोनिया और लिथुआनिया भी ईयू सेना के समर्थक हैं।

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विदेश | दैनिक भास्कर

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