Monday, November 29, 2021
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अमेरिका में दशकों बाद ये बदलाव: कॉलेजों में 60% प्रवेश लड़कियों के; लड़कों की संख्या बढ़ाने के लिए चुपचाप कार्यक्रम लाए जा रहे

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6 घंटे पहले

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नेशनल स्टूडेंट क्लियरिंग हाउस की रिपोर्ट : लॉ, मेडिसिन और डॉक्टरेट में भी बढ़त ले रहीं लड़कियां।

इन दिनों अमेरिकी कॉलेजों में एक अजब तरह का जेंडर असंतुलन दिख रहा है, पर यह बदलाव तकलीफ देने वाला नहीं है। कैम्पसों में हर दो छात्रों की तुलना में तीन छात्राएं दिखने लगी हैं। नेशनल स्टूडेंट क्लियरिंगहाउस के ताजा डेटा में यह खुलासा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इस दौर का सबसे परिवर्तनकारी ट्रेंड है। छात्राओं ने न सिर्फ दशकों पुराने जेंडर गैप को खत्म कर दिया है, बल्कि संख्या के मामले में कॉलेज जाने वाले पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया है। कॉलेज रजिस्ट्रेशन (वसंत-2021) का डेटा बताता है कि यह ट्रेंड धीमा नहीं पड़ने वाला है।

इस बार कॉलेजों में कुल नामांकन देखें तो इनमें 59.5% लड़कियां और 40.5% लड़के हैं। यह ट्रेंड सिर्फ अमेरिका के लिए ही अनूठा नहीं है बल्कि 38 ओईसीडी (उच्च आय वाले औद्योगिक) देशों में भी 25-34 उम्र वर्ग में महिलाओं के पास पुरुषों की तुलना में बड़ी डिग्री होने की ज्यादा संभावना है। इसके अलावा लॉ, मेडिसिन, मास्टर्स और डॉक्टरेट जैसे प्रतिष्ठित कार्यक्रमों में भी महिलाओं ने बढ़त हासिल की है।

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी सेंटर ऑन एजुकेशन एंड वर्कफोर्स की स्टडी के मुताबिक शिक्षा के इस बढ़ते स्तर का पूरा फायदा महिलाओं को नहीं मिला है। पुरुषों की तुलना में उनका वेतन अब भी कम है। पर अब जबकि महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा डिग्रियां ले रही हैं। वर्कफोर्स में भागीदारी बराबर है, ऐसे में उम्मीद जगी है कि भविष्य में ज्यादा वेतन वाली नौकरियां महिलाओं के लिए अनुकूलित होंगी क्योंकि वे शिक्षित वर्कफोर्स का प्रभावशाली हिस्सा होंगी। इससे अर्थव्यवस्था में भी मौलिक बदलाव आएगा।

निकायों में भी लड़कियों का वर्चस्व : 59% प्रेसिडेंट व 74% वाइस प्रेसिडेंट

सिर्फ प्रवेश ही नहीं, महिलाएं कॉलेज लाइफ के हर क्षेत्र में पुरुषों को पीछे छोड़ रही हैं। नेशनल स्टूडेंट क्लियरिंगहाउस के डायरेक्टर डगलस शेपिरो बताते हैं, ‘2019-20 में छात्र निकायों में 59% लड़कियां प्रेसिडेंट बनीं, वहीं वाइस प्रेसिडेंट पद पर उनकी मौजूदगी 74% रही। ऐसे में कॉलेज पुरुष छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए उन्हें प्रवेश में प्राथमिकता दे रहे हैं। उनके समर्थन में चुपचाप कार्यक्रम लागू कर रहे हैं। जैसे इस बार बॉयलर यूनिवर्सिटी ने छात्रों को 7% ज्यादा प्रवेश दिया। क्योंकि वहां छात्राओं की संख्या 60% से ज्यादा है।

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विदेश | दैनिक भास्कर

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